Saturday, 2 April 2016

अंक ज्योतिष

                                       अंक ज्योतिष

अंक ज्योतिष में प्रत्येक अंक की अपनी शक्ति होती है प्रत्येक अंक का स्वामी कोई गृह  होता है। व्यक्ति की जन्म तिथि के अंको के अनुसार ही ग्रहों का उसके जीवन में अनुकूल और प्रतिकूल प्रभाव पडता  है।   जन्म  तिथि के अनुसार ही व्यक्ति का मूलांक और भाग्यांक देखा जाता है और इसी तरह व्यक्ति के नाम का उसके  जीवन पर बहुत प्रभाव पड़ता है। व्यक्ति का नाम उसके भाग्य और प्रतिष्ठा को  बढ़ाने में मदद करता है।   अंक ज्योतिष के अनुसार हम व्यक्ति के नाम के अक्षरों में  परिवर्तन करके उसके भाग्य में बदलाव ला सकते हैं।

अंको का मानव जीवन पर प्रभाव

अंक 1 का सम्बन्ध सूर्य गृह से है अंक 1  वाले व्यक्ति पिता के बहुत नजदीक होते हैं ऐसे व्यक्ति बलवान, गम्भीर, आत्मनिर्भर और दृढ़ इच्छा शक्ति वाले होते हैं। 
अंक 2  का सम्बन्ध चन्दमा  से है अंक 2  वाले व्यक्ति दयालु, धार्मिक, व्यव्हार कुशल, भावुक और कल्पना शील होते हैं।
अंक 3 का सम्बन्ध बृहस्पति गृह से है अंक 3 वाले व्यक्ति अनुशासित, महत्वकांक्षी, धार्मिक और दूसरों का भला करने वाले होते हैं|
अंक 4 का सम्बन्ध राहु गृह से है अंक 4 वाले व्यक्ति मनमौजी, खुशमिजाज और मेहनती होते हैं इनके स्वाभाव को समझना थोड़ा कठिन होता है।
अंक 5  का संबंध बुध गृह से है अंक 5  वाले व्यक्ति दिल के साफ़, दिमाग से सोच कर काम करने वाले और परिवार का  ध्यान रखने वाले होते हैं ऐसे लोग  हर काम जल्दी में  करते हैं।
अंक 6  का सम्बन्ध शुक्र गृह से है अंक 6  वाले  व्यक्ति कला  प्रेमी, आकर्षक, आराम पसंद और नए नए दोस्त बनाने  वाले होते हैं। 
अंक 7  काका  सम्बन्ध केतु गृह से है अंक 7  वाले व्यक्ति कल्पनाशील, परिवर्तन शील विचारधारा के होते हैं ऐसे लोग किसी  से जल्दी  जुड़ पाते और ये अपने मूड के हिसाब से चलते हैं।
अंक 8 का सम्बन्ध शनि गृह से है अंक 8 वाले व्यक्ति कठोर दिल के, गम्भीर स्व्भाव वाले और मेहनती होते हैं  इन्हे जीवन में संघर्ष बहुत करना पडता है। 
 अंक 9  का संबंध मंगल  गृह से है अंक 9  वाले व्यक्ति पराकर्मी, साहसी और मजबूत इरादों वाले होते हैं और ये जीवन  में  कठिनाइयों से कभी नहीं घबराते।

अंक के अनुसार रत्न और धातु

अंक                        गृह                        रत्न                         धातु

1                           सूर्य                        मणिक्य                    सोना और ताम्बा
2                           चन्दर्मा                   मोती                         चांदी
3                           बृहस्पति                 पुखराज                     सोना
4                           राहु                         गोमेद                        चांदी
5                           बुध                         पन्ना                         पंचधातु
6                           शुक्र                        हीरा                           प्लैटिनम
7                           केतु                        लहसुनिया                  शीशा
8                           शनि                       नीलम                        पांच धातु
9                           मंगल                     मूंगा                           सोना और ताम्बा

                                   

Tuesday, 26 January 2016

कर्ज

                                                                कर्ज 
शास्त्रों में कहा गया है की मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है तो सबसे पहले उस पर उसके माता पिता का कर्ज होता है क्योकि बच्चा जन्म के साथ ही अपना पेट भरने केलिए अपनी माँ पर निर्भर होता है माँ के शरीर से वह जन्म लेता है और माँ के शरीर से ही उसकी भूख मिटती है। कहते हैं धरती पर आने से पहले बच्चा परमात्मा से पूछता है कि हे प्रभु मैं तो इतना छोटा हूँ अपने आप तो कुछ भी नहीं कर सकता धरती पर मैं कैसे जिन्दा रहूँगा परम पिता परमात्मा ने कहा बेटा मैंने तुझे धरती पर भेजने से पहले ही दो फ़रिश्ते वहां भेज दिए हैं जो तेरे खाने पीने से लेकर हर तरह से तेरा ध्यान रखेंगे और उनका नाम होगा माता और पिता यानि तेरे (मा बाप) वो हमेशा तेरी रक्षा करेंगे। इसलिए ऐसे सभी व्यक्ति जिनके सर पर उनके माँ बाप का हाथ होता है वो बहुत खुशनसीब होते हैं इसका मतलब यह होता है की परमात्मा का हाथ आपके सर पर है। दुनिया में एक यही कर्ज है जिसे हम कभी नहीं उतार सकते हाँ उनकी सेवा करके या उन्हें मान सम्मान देकर उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं  माँ के मुह से निकली हुई दुवा को भगवान भी नहीं बदल  सकते। कहते हैं बच्चे को धरती पर चलना तो माँ सिखाती है और दुनिया में (जिंदगी में) चलना पिता सिखाते हैं 
हर व्यक्ति को अपने जीवन में यह कोशिश करनी चाहिए की उस पर किसी का  कर्ज न हो चाहे वो रिश्तों की जिम्मेदारियों का कर्ज हो या धन सम्पति का कर्ज हो। यह कहा जाता है की हर व्यक्ति को  अपने जीवन में सारे  कर्ज चुका  कर ही इस दुनिया से जाना चाहिए। अंतिम समय में किसी तरह का कोई कर्ज सर पर नहीं होना चाहिए नहीं तो उस कर्ज को चुकाने के लिए कई जन्म लेने पड़ते हैं। दुनिया में दो तरह के लोगों को सबसे ज्यादा दुखी माना  जाता है एक वो जिसके शरीर में मर्ज (रोग) है और दूसरा जिसके सर पर कर्ज है।  मगर आज समय बहुत बदल गया है बड़ी बड़ी कंपनियां लोगों को उधार देने के लिए  त्यार रहती हैं साईकिल वाला स्कूटर के लिए, स्कूटर वाला कार  के लिए और छोटी कार वाला बड़ी कार के लिए उधार लेता है।  क्रेडिट कार्ड की नई व्यवस्था लोगों को अधिक से अधिक  खर्च करने के लिए उकसाती है। यही खर्च व्यक्ति के सर पर कर्ज के राक्षस के रूप में खड़ा  हो जाता है और कई बार व्यक्ति का पूरा जीवन ही बीत जाता है लेकिन इस राक्षस का पेट  नहीं भरता। 
ऐसे व्यक्ति का पारिवारिक और सामाजिक जीवन दोनों ही तनाव में रहते हैं मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा है कई व्यक्तियों को इसी कर्ज के कारण उपने परिवार और घर को छोड़ कर भागना पड़ता है और आत्महत्या तक करनी करनी पड़ती है।  दुनिया में  उस पिता को भी अच्छा नहीं कहा   जाता जो अपने बच्चों के सर पर कर्ज छोड़ कर जाता है। 
हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि हमें हमारे द्वारा लिया हुआ  कर्ज चुकाना ही पड़ता है चाहे वह किसी भी रूप में और किसी भी जन्म मैं  क्यों न चुकाना पड़े। इसलिए हमे कोशिश करनी चाहिए की अनावश्यक रूप से कर्ज लेने से बचें। वैसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में छठा भाव खराब हो तो वह व्यक्ति  हमेशा कर्ज से पीड़ित रहता है और उस के लिए उपाय भी बताये गए हैं। 

Monday, 25 January 2016

कर्म

                                                                   कर्म 
इस दुनिया मैं जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो  कौन कौन खुशियां मनाता है उसके  माता पिता, दादा दादी, नाना नानी परिवार के सदस्य और रिश्तेदार लेकिन कोई एक ऐसा भी होता है जो उस समय रोता है वह बच्चा जो जन्म लर्ता है लेकिन जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से जाता है तो इसका उल्टा होता है  यानि जाने वाला तो  चला जाता है  समाज और रिश्तेदार रोते  हैं। इस आने और जाने के बीच के समय में इंसान जो कार्य करता है वह उसके कर्म कहलाते हैं कहते हैं के कर्म इंसान के दुनिया छोड़ने पर भी उसका पीछा नहीं छोड़ते और वह मरने के बाद भी अपने अच्छे या बुरे कर्मो  के लिए याद किया जाता है कहा जाता है कि जैसे हजार गायों में भी बछड़ा अपनी माँ को पहचानकर उसके पास पहुँच जाता है ठीक उसी तरह इंसान के कर्म भी उसे पहचान कर उसके पीछे  चलते रहते हैं।  इंसान की प्रतिष्ठा का पता इससे नहीं चलता की उसकी खुशियों में उसके साथ कितने लोग चलते हैं बल्कि उसकी अंतिम यात्रा मे उसके पीछे कितने लोग चलते हैं। यह समाज उन लोगों को  अधिक समय तक याद नहीं रखता जिन्होंने समाज से अधिक से अधिक लिया है चाहे वह कोई बड़ा नेता, अभिनेता या कोई उधोग पति हो बल्कि उन्हें याद करता है जिसने समाज को कुछ दिया है।  हम आज भी याद करते हैं लाला लाजपत राय, सुभाषचन्दर बोसे, चन्दरशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह जैसे वीरों को जिन्होंने समाज से कोई पद, धन दौलत नहीं लिया बल्कि अपने प्राण दे कर भी समाज को देश वासियों को आजादी का उपहार दिया। 
एक व्यक्ति की अर्थी जा रही थी लोगों की भीड़ में कुछ भिखारी भी रोते हुए चलने लगे एक व्यक्ति ने पुछा की आप लोग क्यों  रो रहे हैं तो उन्होंने कहा कि सेठ जी जब भी मंदिर आते थे हमे सौ सौ रूपये देते थे उन भिखारियों  को उस जाने वाले व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं पता उन्हें इस लिए रोना आ रहा है की अब उन्हें सौ रूपये कौन देगा। बचपन में एक कहानी सुनी थी एक व्यक्ति शराब पी कर रोज शाम को अपने घर के बाहर बैठ जाता था  और आते जाते लोगों को गालियां देता था जब उसका अंतिम समय आया तो उसने अपने बेटे से कहा  की मैंने सारा जीवन बुरे कर्म किये हैं शराब पी लोगों को गालियां दी लोग सारा जीवन मुझे कोसते रहे बेटा कुछ ऐसा कर दे जो मरने  के बाद लोग मुझे अच्छा कहें इतना कह कर वह तो मर गया लेकिन लड़के के लिए यह समस्या थी की ऐसा क्या करूँ  की लोग मेरे पिता को अच्छा कहें पिता की अंतिम इच्छा तो पूरी करनी थी।  अगले दिन शाम  को वह लड़का शराब पी कर और  पत्थर लेकर घर के बाहर बैठ गया और हर आने जाने वाले लोगों को गालियां  देता और पत्थर मारने लगा।  एक दो दिन बाद लोग कहने लगे कि इससे तो इसका बाप ही अच्छा था  गालियां तो देता था लेकिन पत्थर नहीं मारता था। इससे यह बात साबित होती है की समाज को गालियां  (देने) वाला भी कुछ समय के लिए अच्छा कहलाया। इस लिए यह प्रार्थना है की रिश्तों में समाज से लेने ही न सीखे अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ ंदेते भी रहें ताकि हमें अपने बच्चों को यह न कहना पड़े की कुछ  ऐसा करना की लोग हमें हमारे जाने के बाद भी याद रखें और अच्छा कहें। 

Sunday, 24 January 2016

रोटी

आज 24 जनवरी एक ठंडी सुबह रविवार अवकाश का दिन फुर्सत के पल चाय के  प्याले के साथ रजाई में बैठ कर समाचार पत्र पद रहा था कि एक खबर पर ध्यान गया की बुंदेलखंड में जब बच्चे (इस देश का भविषय) अपनी माँ से रोटी मांगते हैं तो माँ उन्हें चांटे मरकर का सुला देती हैं क्योकि उन लोगों के पास इतना अनाज भी नहीं है की वो अपने बच्चो को दो वक़्त की रोटी खिला सकें अभी कुछ समय पहले एक न्यूज़ चैनल  में  देखा था कि आदिवासी क्षेत्रों में आज भी माताएँ अपने बच्चों को घास गर्म कर के उस पर नमक डाल कर खाने को देती है और जहाँ आज भी चूहे मार  कर खाए जाते हैं|।  2 दिन बाद 26 जनवरी है भारत का गड्तंत्र दिवस  मुझे भारत के संविधान को पढ़ने है  का सौभाग्य नही मिला लेकिन मैं ये सोचता हूँ की 1950 में जब यह बनाया गया था तो इसे बनाने वाले इस देश के हर बच्चे, हर नागरिक को रोटी का अधिकार भी दे देते तो  इस तरह की ख़बरें शायद अख़बारों में न छपती। इस देश में विकास की बड़ी बड़ी बातें दावे आकड़ों में किये जाते हैं लेकिन दुर्भाग्य की आजादी के 68 साल बाद भी इस देश के बचपन को भूखा रहना पड़ता हैं। जहाँ भगवन श्री कृष्ण कान्हा जी   को  56 भोग का प्रशाद  चढ़ाया जाता है और उन्ही के बालसखा को एक समय की रोटी भी नहीं मिलती। देश में कितनी सरकारें आई और चली गई गरीब को रोटी देने का वायदा तो सब ने किया लेकिन शायद सब ही समझदार थे क्योकि अगर एक बार मैं ही वायदा पूरा कर दिया तो अगली बार फिर क्या वायदा करेंगे। लेकिन शायद हर कार्य के लिए सरकारों को दोष देना भी ठीक  नहीं है क्योकी उनका काम तो शासन चलाना होता है किसी की भूख मिटाना नहीं। 
हमारे देश के बड़े बड़े मंदिरों मैं धन दौलत के भंडार भरे हुए हैं एक ऐसे बाबा जिन्हीने सारा जीवन भिक्षा मांग कर  अपना पेट भरा आज उन्हें सोने और हीरे के सिंघासन पर बिठाया हुआ है क्या इन मंदिरों में बैठे हुए देवी देवताओं  के दिल इन भूखे रहने वाले लोगों को देख कर दुखी नहीं होते या शायद इन मंदिरों के बाहर भी दुनिया है इन्हे  पता ही नहीं होता मैं प्रार्थना करता हूँ इन बड़े बड़े मंदिरों के संचालकों से कृपा कुछ दिन के लिए इन  देवी देवताओं  को अवकाश दें ताकि वो मंदिरों से बाहर आकर  ये देख सकें कि बिना रोटी के लोग कैसे जीवन बिताते हैं तो शायद अपनी जमा पूँजी का कुछ भाग  वे इनके उद्धार के लिए दे दें। 
भारत के धर्म गुरु जो राजाओं की तरह अपना जीवन बिताते हैं अभी 2 साल पहले में मई के महीने में शिमला घूमने  गया था वहां एक गुरु जी के बड़े बड़े बैनर लगे हुए थे जिनका निवास स्थान तो दिल्ली में है लेकिन जून से लेकर सितम्बर तक इनके सत्संग के  प्रोग्राम शिमला, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला आदि हिल स्टेशन पर फिक्स थे ताकि दिल्ली की   गर्मी से छुटकारा मिल सके घूमना भी हो जाये और काम  भी चलता रहे। इनमे से कई धर्म गुरुओं को तो शायद यह भी पता नहीं होगा  की उनके पास इस देश में कुल कितने आश्रम या कितनी पॉपर्टी है इन सभी धरम गुरुओं  से विनती है की अपने संसाधनो से थोड़ा सा इन गरीबो के लिए भी खर्च करें क्योकि खाली सत्संग   से पेट नहीं भरता जीने के लिए तो रोटी ही चाहिए।
हमारे देश मैं बहुत बड़े बड़े दानी और धार्मिक लोग रहते हैं तभी तो भारत को महान देश कहा जाता है हम लोग अमरनाथ जी की यात्रा पर जाने वाले  भक्तो के लिए हजारों फूट ऊंचाई परलंगर लंगा लगा देते हैं शिव का कावड़ लाने  वाले भक्तो के आराम और खाने के लिए सड़कों पर ही सब व्यवस्था कर लेते हैं। उत्तराखंड में परलय आने पर हजारों ट्रक  सामान रातों रात भेज देते हैं अगर हम इस महान देश के सभी नागरिक हर महीने सिर्फ रुपये 10, 20, 50 भी जोड़े तो हर माह इतने फंड्स हो जायेंगे की सब की न सही कुछ लोगों की रोटी का प्रबंध तो हम कर ही  सकते हैं तो इस 26 जनवरी को क्यों न इस अच्छे काम की शुरुआत करें।  



Thursday, 14 January 2016

 जन्म कुंडली के 12 भावों में बृहस्पति (गुरु) का प्रभाव
लग्न (प्रथम) भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को धन की हानि, कार्यों में बाधाएं और व्यर्थ की यात्राएँ होती हैं।
अगर 2रे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को धन का लाभ, मीठा बोलने वाला, धार्मिक और व्यापार में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
3रे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति धार्मिक, स्वाभाव से फुर्तीला और विदेश में जा कर सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
4थे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति मेहनती, सुन्दर, समाज में मान सम्मान प्राप्त करने वाला और अपनी माँ से स्नेह रखने वाला होता है।
5वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति धार्मिक, समाज में लोकप्रिय और गलत कार्यों से धन कमाने वाला होता है।
6थे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति शरीर से कमजोर, जीवन से निराश, मीठा बोलने वाला होता है उसे किसी भी कार्य में  सफलता बहुत कठिनाई से मिलती है।
7वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति भाग्यवान, सुन्दर, धैर्ये से रहने वाला और धार्मिक स्वाभाव का होता है।
8वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति लड़ाई झगड़ा करने वाला, लम्बी आयु जीने वाला और दुखी स्वाभाव वाला होता है।
9वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति बुद्धिमान, भाग्यवान, धार्मिक और समाज में मान सम्मान प्राप्त करने वाला होता है ।
10 वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति चालाक, भाग्यवान, धनवान, धार्मिक और अपने माता पिता से स्नेह रखने वाला होता है।
11वे भ में गुरु हो तो व्यक्ति धनवान, सुन्दर, दानी और व्यापार में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
12वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति निर्धन, कम  बोलने वाला और जीवन में असफल रहने वाला होता है।  

Saturday, 9 January 2016

ग्रहों की गति

                            ग्रहों की गति 

किसी भी व्यक्ति के जन्म के समय जिस भी गृह की दशा चल रही होती है उसे व्यक्ति की जन्म दशा कहते हैं हर गृह की महादशा का समय अलग अलग होता है और यह ग्रहों के क्रम के अनुसार व्यक्ति के जीवन में चलती रहती है पहले आप ग्रहों की दशा के बारे में जान लें। 

ग्रह की दशा                                            समय (वर्ष)
केतु की दशा                                             7 वर्ष 
शुक्र की दशा                                           20 वर्ष 
सूर्य की दशा                                             6 वर्ष 
चन्द्र की दशा                                          10 वर्ष 
मंगल की दशा                                          7 वर्ष
राहु की दशा                                            18 वर्ष 
बृहस्पति की दशा                                    16 वर्ष 
शनि की दशा                                          19 वर्ष 
बुध की दशा                                            17 वर्ष 
येह सभी गृह अपनी महा दशा में व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल देते हैं हर गृह की महादशा में सभी 9  ग्रहों की अन्तर्दशा  चलती है जैसे सूर्य की महादशा में सबसे पहली अन्तर्दशा सूर्य की होती है दूसरो चन्द्र की तीसरी मंगल की, चौथी राहु की, पांचवी बृहस्पति की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवी केतु की और नौवी अन्तर्दश शुक्र की होती है।  दशा और अन्तर्दशा वाले गृह अगर व्यक्ति के अनुकूल हैं तो अच्छे परिणाम मिलते हैं  और अगर दशा और अन्तर्दशा वाले गृह प्रतिकूल हों तो अशुभ फल देते हैं। इस प्रकार जन्म कुंडली के एक भाव से दुसरे भाव में जाने में एक गृह को जितना समय लगता है उसे उस गृह की गति कहते हैं ग्रहों की गति इस प्रकार  होती है 
गृह की गति                                               समय 
सूर्य                                                           30 दिन 
चन्द्र                                                         2\5 दिन 
मंगल                                                        45 दिन 
बुध                                                           28 दिन 
बृहस्पति                                                   13 माह 
शुक्र                                                          28 दिन 
शनि                                                         2 \5 वर्ष 
राहु                                                           18 माह 
केतु                                                           18 माह 

Thursday, 7 January 2016

उपाय

                                                               उपाय

ज्योतिष शास्त्र में हर समस्या के लिए कोई न कोई उपाय बताये गए हैं आज हम आपको इन्ही उपायों के बारे में बता रहे हैं।
अगर कोई व्यक्ति अपने व्यवसाय  को बढ़ाना चाहता है तो
शिव स्त्रोत का पथ करे और शिवलिंग पर जल चढ़ाय।
गायें  को हरा चारा खिलाएं।
व्यापार वृद्धि यन्त्र की पूजा करें।
भगवन गणेश को लड्डू चढ़ाएं।

अगर किसी व्यक्ति की नौकरी न लग रही हो तो
श्री यन्त्र की पूजा करें।
गायत्री मन्त्र का पाठ करें।
सूर्य देव को जल चढ़ायें।
जन्म कुंडली के दसवे भाव में जो राशि हो उसका रत्न पहने।

अगर कोई व्यक्ति कर्ज से परेशान है तो
शिव स्त्रोत का पाठ  करे और शिवलिंग पर जल चढाये ।
जन्म कुंडली के  छठे भाव में  जो राशि हो उस राशि  के स्वामी गृह की पूजा करें।
श्री ऋण मुक्ति यंत्र की पूजा करें।
जानवरों को खाना खिलायें।

अगर किसी व्यक्ती की शादी में रूकावट आ रही हो तो
शिव पार्वती की पूजा करें।
अगर लड़का है तो डायमंड या ओपेल रत्न पहने और शुक्र देव की पूजा करे।
अगर लड़की है तो पुखराज पहने और बृहस्पति देव की पूजा करे।
जन्म कुंडली के सातवें भाव में जो राशि हो उसके स्वामी गृह की पूजा करें।

अगर कोई व्यक्ति लम्बी बीमारी से परेशान हो तो
जन्म कुंडली के पहले  भाव में जो राशि हो उसके स्वामी गृह का रत्न पहने।
महामृत्युंजय मन्त्र का पाठ करें।
सूर्य देव को रोज जल चढ़ायें।
एकमुखी रुद्राक्ष धारण करें।