Tuesday, 26 January 2016

कर्ज

                                                                कर्ज 
शास्त्रों में कहा गया है की मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है तो सबसे पहले उस पर उसके माता पिता का कर्ज होता है क्योकि बच्चा जन्म के साथ ही अपना पेट भरने केलिए अपनी माँ पर निर्भर होता है माँ के शरीर से वह जन्म लेता है और माँ के शरीर से ही उसकी भूख मिटती है। कहते हैं धरती पर आने से पहले बच्चा परमात्मा से पूछता है कि हे प्रभु मैं तो इतना छोटा हूँ अपने आप तो कुछ भी नहीं कर सकता धरती पर मैं कैसे जिन्दा रहूँगा परम पिता परमात्मा ने कहा बेटा मैंने तुझे धरती पर भेजने से पहले ही दो फ़रिश्ते वहां भेज दिए हैं जो तेरे खाने पीने से लेकर हर तरह से तेरा ध्यान रखेंगे और उनका नाम होगा माता और पिता यानि तेरे (मा बाप) वो हमेशा तेरी रक्षा करेंगे। इसलिए ऐसे सभी व्यक्ति जिनके सर पर उनके माँ बाप का हाथ होता है वो बहुत खुशनसीब होते हैं इसका मतलब यह होता है की परमात्मा का हाथ आपके सर पर है। दुनिया में एक यही कर्ज है जिसे हम कभी नहीं उतार सकते हाँ उनकी सेवा करके या उन्हें मान सम्मान देकर उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं  माँ के मुह से निकली हुई दुवा को भगवान भी नहीं बदल  सकते। कहते हैं बच्चे को धरती पर चलना तो माँ सिखाती है और दुनिया में (जिंदगी में) चलना पिता सिखाते हैं 
हर व्यक्ति को अपने जीवन में यह कोशिश करनी चाहिए की उस पर किसी का  कर्ज न हो चाहे वो रिश्तों की जिम्मेदारियों का कर्ज हो या धन सम्पति का कर्ज हो। यह कहा जाता है की हर व्यक्ति को  अपने जीवन में सारे  कर्ज चुका  कर ही इस दुनिया से जाना चाहिए। अंतिम समय में किसी तरह का कोई कर्ज सर पर नहीं होना चाहिए नहीं तो उस कर्ज को चुकाने के लिए कई जन्म लेने पड़ते हैं। दुनिया में दो तरह के लोगों को सबसे ज्यादा दुखी माना  जाता है एक वो जिसके शरीर में मर्ज (रोग) है और दूसरा जिसके सर पर कर्ज है।  मगर आज समय बहुत बदल गया है बड़ी बड़ी कंपनियां लोगों को उधार देने के लिए  त्यार रहती हैं साईकिल वाला स्कूटर के लिए, स्कूटर वाला कार  के लिए और छोटी कार वाला बड़ी कार के लिए उधार लेता है।  क्रेडिट कार्ड की नई व्यवस्था लोगों को अधिक से अधिक  खर्च करने के लिए उकसाती है। यही खर्च व्यक्ति के सर पर कर्ज के राक्षस के रूप में खड़ा  हो जाता है और कई बार व्यक्ति का पूरा जीवन ही बीत जाता है लेकिन इस राक्षस का पेट  नहीं भरता। 
ऐसे व्यक्ति का पारिवारिक और सामाजिक जीवन दोनों ही तनाव में रहते हैं मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा है कई व्यक्तियों को इसी कर्ज के कारण उपने परिवार और घर को छोड़ कर भागना पड़ता है और आत्महत्या तक करनी करनी पड़ती है।  दुनिया में  उस पिता को भी अच्छा नहीं कहा   जाता जो अपने बच्चों के सर पर कर्ज छोड़ कर जाता है। 
हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि हमें हमारे द्वारा लिया हुआ  कर्ज चुकाना ही पड़ता है चाहे वह किसी भी रूप में और किसी भी जन्म मैं  क्यों न चुकाना पड़े। इसलिए हमे कोशिश करनी चाहिए की अनावश्यक रूप से कर्ज लेने से बचें। वैसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में छठा भाव खराब हो तो वह व्यक्ति  हमेशा कर्ज से पीड़ित रहता है और उस के लिए उपाय भी बताये गए हैं। 

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