Thursday, 14 January 2016

 जन्म कुंडली के 12 भावों में बृहस्पति (गुरु) का प्रभाव
लग्न (प्रथम) भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को धन की हानि, कार्यों में बाधाएं और व्यर्थ की यात्राएँ होती हैं।
अगर 2रे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को धन का लाभ, मीठा बोलने वाला, धार्मिक और व्यापार में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
3रे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति धार्मिक, स्वाभाव से फुर्तीला और विदेश में जा कर सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
4थे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति मेहनती, सुन्दर, समाज में मान सम्मान प्राप्त करने वाला और अपनी माँ से स्नेह रखने वाला होता है।
5वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति धार्मिक, समाज में लोकप्रिय और गलत कार्यों से धन कमाने वाला होता है।
6थे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति शरीर से कमजोर, जीवन से निराश, मीठा बोलने वाला होता है उसे किसी भी कार्य में  सफलता बहुत कठिनाई से मिलती है।
7वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति भाग्यवान, सुन्दर, धैर्ये से रहने वाला और धार्मिक स्वाभाव का होता है।
8वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति लड़ाई झगड़ा करने वाला, लम्बी आयु जीने वाला और दुखी स्वाभाव वाला होता है।
9वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति बुद्धिमान, भाग्यवान, धार्मिक और समाज में मान सम्मान प्राप्त करने वाला होता है ।
10 वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति चालाक, भाग्यवान, धनवान, धार्मिक और अपने माता पिता से स्नेह रखने वाला होता है।
11वे भ में गुरु हो तो व्यक्ति धनवान, सुन्दर, दानी और व्यापार में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
12वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति निर्धन, कम  बोलने वाला और जीवन में असफल रहने वाला होता है।  

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