ग्रहों की गति
किसी भी व्यक्ति के जन्म के समय जिस भी गृह की दशा चल रही होती है उसे व्यक्ति की जन्म दशा कहते हैं हर गृह की महादशा का समय अलग अलग होता है और यह ग्रहों के क्रम के अनुसार व्यक्ति के जीवन में चलती रहती है पहले आप ग्रहों की दशा के बारे में जान लें।
ग्रह की दशा समय (वर्ष)
केतु की दशा 7 वर्ष
शुक्र की दशा 20 वर्ष
सूर्य की दशा 6 वर्ष
चन्द्र की दशा 10 वर्ष
मंगल की दशा 7 वर्ष
राहु की दशा 18 वर्ष
बृहस्पति की दशा 16 वर्ष
शनि की दशा 19 वर्ष
बुध की दशा 17 वर्ष
येह सभी गृह अपनी महा दशा में व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल देते हैं हर गृह की महादशा में सभी 9 ग्रहों की अन्तर्दशा चलती है जैसे सूर्य की महादशा में सबसे पहली अन्तर्दशा सूर्य की होती है दूसरो चन्द्र की तीसरी मंगल की, चौथी राहु की, पांचवी बृहस्पति की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवी केतु की और नौवी अन्तर्दश शुक्र की होती है। दशा और अन्तर्दशा वाले गृह अगर व्यक्ति के अनुकूल हैं तो अच्छे परिणाम मिलते हैं और अगर दशा और अन्तर्दशा वाले गृह प्रतिकूल हों तो अशुभ फल देते हैं। इस प्रकार जन्म कुंडली के एक भाव से दुसरे भाव में जाने में एक गृह को जितना समय लगता है उसे उस गृह की गति कहते हैं ग्रहों की गति इस प्रकार होती है
गृह की गति समय
सूर्य 30 दिन
चन्द्र 2\5 दिन
मंगल 45 दिन
बुध 28 दिन
बृहस्पति 13 माह
शुक्र 28 दिन
शनि 2 \5 वर्ष
राहु 18 माह
केतु 18 माह
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