Tuesday, 26 January 2016

कर्ज

                                                                कर्ज 
शास्त्रों में कहा गया है की मनुष्य जब इस धरती पर जन्म लेता है तो सबसे पहले उस पर उसके माता पिता का कर्ज होता है क्योकि बच्चा जन्म के साथ ही अपना पेट भरने केलिए अपनी माँ पर निर्भर होता है माँ के शरीर से वह जन्म लेता है और माँ के शरीर से ही उसकी भूख मिटती है। कहते हैं धरती पर आने से पहले बच्चा परमात्मा से पूछता है कि हे प्रभु मैं तो इतना छोटा हूँ अपने आप तो कुछ भी नहीं कर सकता धरती पर मैं कैसे जिन्दा रहूँगा परम पिता परमात्मा ने कहा बेटा मैंने तुझे धरती पर भेजने से पहले ही दो फ़रिश्ते वहां भेज दिए हैं जो तेरे खाने पीने से लेकर हर तरह से तेरा ध्यान रखेंगे और उनका नाम होगा माता और पिता यानि तेरे (मा बाप) वो हमेशा तेरी रक्षा करेंगे। इसलिए ऐसे सभी व्यक्ति जिनके सर पर उनके माँ बाप का हाथ होता है वो बहुत खुशनसीब होते हैं इसका मतलब यह होता है की परमात्मा का हाथ आपके सर पर है। दुनिया में एक यही कर्ज है जिसे हम कभी नहीं उतार सकते हाँ उनकी सेवा करके या उन्हें मान सम्मान देकर उनके आशीर्वाद से अपने जीवन को खुशहाल बना सकते हैं  माँ के मुह से निकली हुई दुवा को भगवान भी नहीं बदल  सकते। कहते हैं बच्चे को धरती पर चलना तो माँ सिखाती है और दुनिया में (जिंदगी में) चलना पिता सिखाते हैं 
हर व्यक्ति को अपने जीवन में यह कोशिश करनी चाहिए की उस पर किसी का  कर्ज न हो चाहे वो रिश्तों की जिम्मेदारियों का कर्ज हो या धन सम्पति का कर्ज हो। यह कहा जाता है की हर व्यक्ति को  अपने जीवन में सारे  कर्ज चुका  कर ही इस दुनिया से जाना चाहिए। अंतिम समय में किसी तरह का कोई कर्ज सर पर नहीं होना चाहिए नहीं तो उस कर्ज को चुकाने के लिए कई जन्म लेने पड़ते हैं। दुनिया में दो तरह के लोगों को सबसे ज्यादा दुखी माना  जाता है एक वो जिसके शरीर में मर्ज (रोग) है और दूसरा जिसके सर पर कर्ज है।  मगर आज समय बहुत बदल गया है बड़ी बड़ी कंपनियां लोगों को उधार देने के लिए  त्यार रहती हैं साईकिल वाला स्कूटर के लिए, स्कूटर वाला कार  के लिए और छोटी कार वाला बड़ी कार के लिए उधार लेता है।  क्रेडिट कार्ड की नई व्यवस्था लोगों को अधिक से अधिक  खर्च करने के लिए उकसाती है। यही खर्च व्यक्ति के सर पर कर्ज के राक्षस के रूप में खड़ा  हो जाता है और कई बार व्यक्ति का पूरा जीवन ही बीत जाता है लेकिन इस राक्षस का पेट  नहीं भरता। 
ऐसे व्यक्ति का पारिवारिक और सामाजिक जीवन दोनों ही तनाव में रहते हैं मैंने व्यक्तिगत रूप से देखा है कई व्यक्तियों को इसी कर्ज के कारण उपने परिवार और घर को छोड़ कर भागना पड़ता है और आत्महत्या तक करनी करनी पड़ती है।  दुनिया में  उस पिता को भी अच्छा नहीं कहा   जाता जो अपने बच्चों के सर पर कर्ज छोड़ कर जाता है। 
हमारे शास्त्रों में कहा गया है कि हमें हमारे द्वारा लिया हुआ  कर्ज चुकाना ही पड़ता है चाहे वह किसी भी रूप में और किसी भी जन्म मैं  क्यों न चुकाना पड़े। इसलिए हमे कोशिश करनी चाहिए की अनावश्यक रूप से कर्ज लेने से बचें। वैसे ज्योतिष शास्त्र के अनुसार अगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में छठा भाव खराब हो तो वह व्यक्ति  हमेशा कर्ज से पीड़ित रहता है और उस के लिए उपाय भी बताये गए हैं। 

Monday, 25 January 2016

कर्म

                                                                   कर्म 
इस दुनिया मैं जब किसी बच्चे का जन्म होता है तो  कौन कौन खुशियां मनाता है उसके  माता पिता, दादा दादी, नाना नानी परिवार के सदस्य और रिश्तेदार लेकिन कोई एक ऐसा भी होता है जो उस समय रोता है वह बच्चा जो जन्म लर्ता है लेकिन जब कोई व्यक्ति इस दुनिया से जाता है तो इसका उल्टा होता है  यानि जाने वाला तो  चला जाता है  समाज और रिश्तेदार रोते  हैं। इस आने और जाने के बीच के समय में इंसान जो कार्य करता है वह उसके कर्म कहलाते हैं कहते हैं के कर्म इंसान के दुनिया छोड़ने पर भी उसका पीछा नहीं छोड़ते और वह मरने के बाद भी अपने अच्छे या बुरे कर्मो  के लिए याद किया जाता है कहा जाता है कि जैसे हजार गायों में भी बछड़ा अपनी माँ को पहचानकर उसके पास पहुँच जाता है ठीक उसी तरह इंसान के कर्म भी उसे पहचान कर उसके पीछे  चलते रहते हैं।  इंसान की प्रतिष्ठा का पता इससे नहीं चलता की उसकी खुशियों में उसके साथ कितने लोग चलते हैं बल्कि उसकी अंतिम यात्रा मे उसके पीछे कितने लोग चलते हैं। यह समाज उन लोगों को  अधिक समय तक याद नहीं रखता जिन्होंने समाज से अधिक से अधिक लिया है चाहे वह कोई बड़ा नेता, अभिनेता या कोई उधोग पति हो बल्कि उन्हें याद करता है जिसने समाज को कुछ दिया है।  हम आज भी याद करते हैं लाला लाजपत राय, सुभाषचन्दर बोसे, चन्दरशेखर आजाद, सरदार भगत सिंह जैसे वीरों को जिन्होंने समाज से कोई पद, धन दौलत नहीं लिया बल्कि अपने प्राण दे कर भी समाज को देश वासियों को आजादी का उपहार दिया। 
एक व्यक्ति की अर्थी जा रही थी लोगों की भीड़ में कुछ भिखारी भी रोते हुए चलने लगे एक व्यक्ति ने पुछा की आप लोग क्यों  रो रहे हैं तो उन्होंने कहा कि सेठ जी जब भी मंदिर आते थे हमे सौ सौ रूपये देते थे उन भिखारियों  को उस जाने वाले व्यक्ति के बारे में कुछ नहीं पता उन्हें इस लिए रोना आ रहा है की अब उन्हें सौ रूपये कौन देगा। बचपन में एक कहानी सुनी थी एक व्यक्ति शराब पी कर रोज शाम को अपने घर के बाहर बैठ जाता था  और आते जाते लोगों को गालियां देता था जब उसका अंतिम समय आया तो उसने अपने बेटे से कहा  की मैंने सारा जीवन बुरे कर्म किये हैं शराब पी लोगों को गालियां दी लोग सारा जीवन मुझे कोसते रहे बेटा कुछ ऐसा कर दे जो मरने  के बाद लोग मुझे अच्छा कहें इतना कह कर वह तो मर गया लेकिन लड़के के लिए यह समस्या थी की ऐसा क्या करूँ  की लोग मेरे पिता को अच्छा कहें पिता की अंतिम इच्छा तो पूरी करनी थी।  अगले दिन शाम  को वह लड़का शराब पी कर और  पत्थर लेकर घर के बाहर बैठ गया और हर आने जाने वाले लोगों को गालियां  देता और पत्थर मारने लगा।  एक दो दिन बाद लोग कहने लगे कि इससे तो इसका बाप ही अच्छा था  गालियां तो देता था लेकिन पत्थर नहीं मारता था। इससे यह बात साबित होती है की समाज को गालियां  (देने) वाला भी कुछ समय के लिए अच्छा कहलाया। इस लिए यह प्रार्थना है की रिश्तों में समाज से लेने ही न सीखे अपनी सामर्थ्य के अनुसार कुछ ंदेते भी रहें ताकि हमें अपने बच्चों को यह न कहना पड़े की कुछ  ऐसा करना की लोग हमें हमारे जाने के बाद भी याद रखें और अच्छा कहें। 

Sunday, 24 January 2016

रोटी

आज 24 जनवरी एक ठंडी सुबह रविवार अवकाश का दिन फुर्सत के पल चाय के  प्याले के साथ रजाई में बैठ कर समाचार पत्र पद रहा था कि एक खबर पर ध्यान गया की बुंदेलखंड में जब बच्चे (इस देश का भविषय) अपनी माँ से रोटी मांगते हैं तो माँ उन्हें चांटे मरकर का सुला देती हैं क्योकि उन लोगों के पास इतना अनाज भी नहीं है की वो अपने बच्चो को दो वक़्त की रोटी खिला सकें अभी कुछ समय पहले एक न्यूज़ चैनल  में  देखा था कि आदिवासी क्षेत्रों में आज भी माताएँ अपने बच्चों को घास गर्म कर के उस पर नमक डाल कर खाने को देती है और जहाँ आज भी चूहे मार  कर खाए जाते हैं|।  2 दिन बाद 26 जनवरी है भारत का गड्तंत्र दिवस  मुझे भारत के संविधान को पढ़ने है  का सौभाग्य नही मिला लेकिन मैं ये सोचता हूँ की 1950 में जब यह बनाया गया था तो इसे बनाने वाले इस देश के हर बच्चे, हर नागरिक को रोटी का अधिकार भी दे देते तो  इस तरह की ख़बरें शायद अख़बारों में न छपती। इस देश में विकास की बड़ी बड़ी बातें दावे आकड़ों में किये जाते हैं लेकिन दुर्भाग्य की आजादी के 68 साल बाद भी इस देश के बचपन को भूखा रहना पड़ता हैं। जहाँ भगवन श्री कृष्ण कान्हा जी   को  56 भोग का प्रशाद  चढ़ाया जाता है और उन्ही के बालसखा को एक समय की रोटी भी नहीं मिलती। देश में कितनी सरकारें आई और चली गई गरीब को रोटी देने का वायदा तो सब ने किया लेकिन शायद सब ही समझदार थे क्योकि अगर एक बार मैं ही वायदा पूरा कर दिया तो अगली बार फिर क्या वायदा करेंगे। लेकिन शायद हर कार्य के लिए सरकारों को दोष देना भी ठीक  नहीं है क्योकी उनका काम तो शासन चलाना होता है किसी की भूख मिटाना नहीं। 
हमारे देश के बड़े बड़े मंदिरों मैं धन दौलत के भंडार भरे हुए हैं एक ऐसे बाबा जिन्हीने सारा जीवन भिक्षा मांग कर  अपना पेट भरा आज उन्हें सोने और हीरे के सिंघासन पर बिठाया हुआ है क्या इन मंदिरों में बैठे हुए देवी देवताओं  के दिल इन भूखे रहने वाले लोगों को देख कर दुखी नहीं होते या शायद इन मंदिरों के बाहर भी दुनिया है इन्हे  पता ही नहीं होता मैं प्रार्थना करता हूँ इन बड़े बड़े मंदिरों के संचालकों से कृपा कुछ दिन के लिए इन  देवी देवताओं  को अवकाश दें ताकि वो मंदिरों से बाहर आकर  ये देख सकें कि बिना रोटी के लोग कैसे जीवन बिताते हैं तो शायद अपनी जमा पूँजी का कुछ भाग  वे इनके उद्धार के लिए दे दें। 
भारत के धर्म गुरु जो राजाओं की तरह अपना जीवन बिताते हैं अभी 2 साल पहले में मई के महीने में शिमला घूमने  गया था वहां एक गुरु जी के बड़े बड़े बैनर लगे हुए थे जिनका निवास स्थान तो दिल्ली में है लेकिन जून से लेकर सितम्बर तक इनके सत्संग के  प्रोग्राम शिमला, कुल्लू, मनाली, धर्मशाला आदि हिल स्टेशन पर फिक्स थे ताकि दिल्ली की   गर्मी से छुटकारा मिल सके घूमना भी हो जाये और काम  भी चलता रहे। इनमे से कई धर्म गुरुओं को तो शायद यह भी पता नहीं होगा  की उनके पास इस देश में कुल कितने आश्रम या कितनी पॉपर्टी है इन सभी धरम गुरुओं  से विनती है की अपने संसाधनो से थोड़ा सा इन गरीबो के लिए भी खर्च करें क्योकि खाली सत्संग   से पेट नहीं भरता जीने के लिए तो रोटी ही चाहिए।
हमारे देश मैं बहुत बड़े बड़े दानी और धार्मिक लोग रहते हैं तभी तो भारत को महान देश कहा जाता है हम लोग अमरनाथ जी की यात्रा पर जाने वाले  भक्तो के लिए हजारों फूट ऊंचाई परलंगर लंगा लगा देते हैं शिव का कावड़ लाने  वाले भक्तो के आराम और खाने के लिए सड़कों पर ही सब व्यवस्था कर लेते हैं। उत्तराखंड में परलय आने पर हजारों ट्रक  सामान रातों रात भेज देते हैं अगर हम इस महान देश के सभी नागरिक हर महीने सिर्फ रुपये 10, 20, 50 भी जोड़े तो हर माह इतने फंड्स हो जायेंगे की सब की न सही कुछ लोगों की रोटी का प्रबंध तो हम कर ही  सकते हैं तो इस 26 जनवरी को क्यों न इस अच्छे काम की शुरुआत करें।  



Thursday, 14 January 2016

 जन्म कुंडली के 12 भावों में बृहस्पति (गुरु) का प्रभाव
लग्न (प्रथम) भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को धन की हानि, कार्यों में बाधाएं और व्यर्थ की यात्राएँ होती हैं।
अगर 2रे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति को धन का लाभ, मीठा बोलने वाला, धार्मिक और व्यापार में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
3रे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति धार्मिक, स्वाभाव से फुर्तीला और विदेश में जा कर सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
4थे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति मेहनती, सुन्दर, समाज में मान सम्मान प्राप्त करने वाला और अपनी माँ से स्नेह रखने वाला होता है।
5वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति धार्मिक, समाज में लोकप्रिय और गलत कार्यों से धन कमाने वाला होता है।
6थे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति शरीर से कमजोर, जीवन से निराश, मीठा बोलने वाला होता है उसे किसी भी कार्य में  सफलता बहुत कठिनाई से मिलती है।
7वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति भाग्यवान, सुन्दर, धैर्ये से रहने वाला और धार्मिक स्वाभाव का होता है।
8वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति लड़ाई झगड़ा करने वाला, लम्बी आयु जीने वाला और दुखी स्वाभाव वाला होता है।
9वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति बुद्धिमान, भाग्यवान, धार्मिक और समाज में मान सम्मान प्राप्त करने वाला होता है ।
10 वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति चालाक, भाग्यवान, धनवान, धार्मिक और अपने माता पिता से स्नेह रखने वाला होता है।
11वे भ में गुरु हो तो व्यक्ति धनवान, सुन्दर, दानी और व्यापार में सफलता प्राप्त करने वाला होता है।
12वे भाव में गुरु हो तो व्यक्ति निर्धन, कम  बोलने वाला और जीवन में असफल रहने वाला होता है।  

Saturday, 9 January 2016

ग्रहों की गति

                            ग्रहों की गति 

किसी भी व्यक्ति के जन्म के समय जिस भी गृह की दशा चल रही होती है उसे व्यक्ति की जन्म दशा कहते हैं हर गृह की महादशा का समय अलग अलग होता है और यह ग्रहों के क्रम के अनुसार व्यक्ति के जीवन में चलती रहती है पहले आप ग्रहों की दशा के बारे में जान लें। 

ग्रह की दशा                                            समय (वर्ष)
केतु की दशा                                             7 वर्ष 
शुक्र की दशा                                           20 वर्ष 
सूर्य की दशा                                             6 वर्ष 
चन्द्र की दशा                                          10 वर्ष 
मंगल की दशा                                          7 वर्ष
राहु की दशा                                            18 वर्ष 
बृहस्पति की दशा                                    16 वर्ष 
शनि की दशा                                          19 वर्ष 
बुध की दशा                                            17 वर्ष 
येह सभी गृह अपनी महा दशा में व्यक्ति को शुभ और अशुभ फल देते हैं हर गृह की महादशा में सभी 9  ग्रहों की अन्तर्दशा  चलती है जैसे सूर्य की महादशा में सबसे पहली अन्तर्दशा सूर्य की होती है दूसरो चन्द्र की तीसरी मंगल की, चौथी राहु की, पांचवी बृहस्पति की, छठी शनि की, सातवीं बुध की, आठवी केतु की और नौवी अन्तर्दश शुक्र की होती है।  दशा और अन्तर्दशा वाले गृह अगर व्यक्ति के अनुकूल हैं तो अच्छे परिणाम मिलते हैं  और अगर दशा और अन्तर्दशा वाले गृह प्रतिकूल हों तो अशुभ फल देते हैं। इस प्रकार जन्म कुंडली के एक भाव से दुसरे भाव में जाने में एक गृह को जितना समय लगता है उसे उस गृह की गति कहते हैं ग्रहों की गति इस प्रकार  होती है 
गृह की गति                                               समय 
सूर्य                                                           30 दिन 
चन्द्र                                                         2\5 दिन 
मंगल                                                        45 दिन 
बुध                                                           28 दिन 
बृहस्पति                                                   13 माह 
शुक्र                                                          28 दिन 
शनि                                                         2 \5 वर्ष 
राहु                                                           18 माह 
केतु                                                           18 माह 

Thursday, 7 January 2016

उपाय

                                                               उपाय

ज्योतिष शास्त्र में हर समस्या के लिए कोई न कोई उपाय बताये गए हैं आज हम आपको इन्ही उपायों के बारे में बता रहे हैं।
अगर कोई व्यक्ति अपने व्यवसाय  को बढ़ाना चाहता है तो
शिव स्त्रोत का पथ करे और शिवलिंग पर जल चढ़ाय।
गायें  को हरा चारा खिलाएं।
व्यापार वृद्धि यन्त्र की पूजा करें।
भगवन गणेश को लड्डू चढ़ाएं।

अगर किसी व्यक्ति की नौकरी न लग रही हो तो
श्री यन्त्र की पूजा करें।
गायत्री मन्त्र का पाठ करें।
सूर्य देव को जल चढ़ायें।
जन्म कुंडली के दसवे भाव में जो राशि हो उसका रत्न पहने।

अगर कोई व्यक्ति कर्ज से परेशान है तो
शिव स्त्रोत का पाठ  करे और शिवलिंग पर जल चढाये ।
जन्म कुंडली के  छठे भाव में  जो राशि हो उस राशि  के स्वामी गृह की पूजा करें।
श्री ऋण मुक्ति यंत्र की पूजा करें।
जानवरों को खाना खिलायें।

अगर किसी व्यक्ती की शादी में रूकावट आ रही हो तो
शिव पार्वती की पूजा करें।
अगर लड़का है तो डायमंड या ओपेल रत्न पहने और शुक्र देव की पूजा करे।
अगर लड़की है तो पुखराज पहने और बृहस्पति देव की पूजा करे।
जन्म कुंडली के सातवें भाव में जो राशि हो उसके स्वामी गृह की पूजा करें।

अगर कोई व्यक्ति लम्बी बीमारी से परेशान हो तो
जन्म कुंडली के पहले  भाव में जो राशि हो उसके स्वामी गृह का रत्न पहने।
महामृत्युंजय मन्त्र का पाठ करें।
सूर्य देव को रोज जल चढ़ायें।
एकमुखी रुद्राक्ष धारण करें। 

रत्नो से स्वास्थ्य का लाभ

                      रत्नो से स्वास्थ्य का लाभ
रत्न हमारे स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायक होते हैं यहां आपको बता  रहे हैं की कौन सा रत्न धारण करना कौन सी बीमारी के लिए लाभदायक है।
रत्न                      बीमारी में लाभ
माणिक्य               खून की कमी, आँखों के रोग और दिल की बीमारी
मोती                     आँखों के रोग, दिल के रोग और नींद न आना
मूंगा                      खून की कमी, बुखार गोर गर्भपात
पन्ना                    दिमागी परेशानी, शारीरिक कमजोरी और फेफड़े के रोग
पुखराज                 लीवर की बीमारी, दिल के रोग और पीलिया
हीरा                       आँखों के रोग, शारीरिक कमजोरी
नीलम                    कान  के रोग, मिर्गी या लकवा
गोमेद                     त्वचा रोग, वायु विकार या कुष्ठ रोग
लहसुनिया               त्वचा रोग, दमा या कैंसर 

गृह के अनुसार रत्न

                                                   गृह के अनुसार रत्न
ज्योतिष शास्त्र में हर गृह के लिए कोई न कोई रत्न बताया गया है आप गृह के अनुसार रत्न धारण कर सकते हैं यहां आपको रत्नो के बारे में जानकारी दे रहे हैं।

गृह             रत्न                 रत्न का वजन               धातु               अंगुली               समय          दिन

सूर्य            माणिक्य          4 से 6  रति                सोना या ताम्बा   अनामिका         सुबह          रविवार
चन्द्र           मोती                4  से 6  रति              चांदी                   कनिष्ठिका       सुबह          सोमवार
मंगल          मूंगा                 6 से 7 रति               चांदी                  अनामिका         सुबह          मंगलवार
बुध             पन्ना                4 से 5 रति               सोना                  कनिष्ठिका       सुबह          बुधवार बृहस्पति      पुखराज            4 से 5 रति               सोना                  तर्जनी               सुबह         बृहस्पतिवार
शुक्र             हीरा                  1/2 रति                  चांदी या              कनिष्ठिका        सुबह         शुक्रवार 
                                                                         प्लैटिनम
शनि             नीलम या         4 से 5 रति              पंचधातु या          मध्यमा            शाम           शनिवार
                    नीली                                              चांदी
राहु               गोमेद               5 से 6 रति              अष्टधातु या        मध्यमा            सूर्यास्त       शनिवार
                                                                          चांदी
केतु              लहसुनिया         6 से 7 रति              चांदी                    अनामिका         सूर्यास्त       बुधवार 

Sunday, 3 January 2016

गोचर कुंडली के 12 भावों मैं चन्द्र के फल

                गोचर कुंडली के 12  भावों मैं चन्द्र के फल 

  • जिस दिन, महीने, वर्ष, समय और स्थान में किसी व्यक्ति का जन्म  होता है उसके अनुसार ग्रहों की स्थिति देख कर जन्म कुंडली बनाई जाती है और गृह जिस राशि में  गोचर करते हैं अर्थात कौन सा गृह अभी आज किस स्तिथि में है (वर्तमान में) उसके अनुसार जीवन में कब कैसे फल मिलेंगे यह जानने के लिए गोचर कुंडली बनाई जाती है। आज हम आपको बताएंगे गोचर कुंडली के 12 भावों में  चन्द्र  के फल के बारे में||
  • भाव                     फल
  • प्रथम भाव            शुभ समाचार मिलते हैं,  कार्यों मैं सफलता मिलती है और जीवन में सुख सुविधा में वृधि होती                             है। 
  • 2 रा भाव               जीवन में परेशानियां, धन की हानि, खर्च अधिक, लड़ाई झगडे और समाज में मान सम्मान                                 की हानि होती है। 
  • 3 रा भाव               कार्य बनते हैं, परिवार में आर्थिक रूप से सम्पन्ता, धन का लाभ और सुख सुविधाओं में वृद्धि                             होती है। 
  • 4 था भाव              मानसिक तनाव, कार्यों में  बाधाएं, अचानक कोई कष्ट और चिंता रहती है। 
  • 5 वा  भाव              घर से दूर की यात्रा, धन का लाभ और मानसिक चिंता रहती है। 
  • 6 ठा भाव               दुश्मनो पर विजय, स्वास्थय अच्छा रहता है और सुख सुविधाओं में वृद्धि होती है। 
  • 7 व भाव                धन का लाभ, कार्यों में  सफलता और सुख सुविधाओं में वृद्धि होती है। 
  • 8 व भाव                कार्यों में असफलता, परेशानियां और अशुभ फल प्राप्त होते हैं। 
  • 9 व भाव                 धन की हानि, व्यापार या रोजगार में असफलता और मानसिक चिंता रहती है। 
  • 10 वा भाव              जीवन में उत्साह, कार्यों में सफलता और परिवार में ख़ुशी का माहौल रहता है। 
  • 11 वा भाव               आत्मविश्वास बढ़ता है, नए दोस्त बनते हैं, व्यापार रोजगार में सफलता और शुभ समाचार                                 मिलते हैं।
  • 12 वा भाव               जीवन में परेशानी, खर्चों का जोर और दुर्घटना के योग बनते हैं।  

गोचर कुंडली के 12 भावों में सूर्य के फल

                     गोचर कुंडली के 12  भावों में सूर्य के फल

  • जिस दिन, महीने, वर्ष, समय और स्थान में किसी व्यक्ति का जन्म  होता है उसके अनुसार ग्रहों की स्थिति देख कर जन्म कुंडली बनाई जाती है और गृह जिस राशि में  गोचर करते हैं अर्थात कौन सा गृह अभी आज किस स्तिथि में है (वर्तमान में) उसके अनुसार जीवन में कब कैसे फल मिलेंगे यह जानने के लिए गोचर कुंडली बनाई जाती है। आज हम आपको बताएंगे गोचर कुंडली के 12 भावों में  सूर्य के फल के बारे में।
  • भाव                  फल '
  • पहला भाव         जीवन में परेशानी, खर्च अधिक, बात बात में गुस्सा आना और कार्यों में  बाधाएं आती हैं।
  • 2 रा भाव            व्यापर में  धोखा, धन का नाश, खर्च अधिक, सुख में  कमी, जिद्दी स्वाभाव और आँखों में                                 तकलीफ रहती है
  • 3रा भाव              अचानक धन की प्राप्ति, धन का लाभ, परिवार में खुशियां, मन में प्रसन्नता और रोगों से                                 मुक्ति मिलती है।
  • 4 था भाव            शरीर में आलस, शरीर में रोग, पारिवारिक सुख में कमी और पत्नी से वाद विवाद रहता है।
  • 5 व भाव              मानसिक चिंता , मानसिक परेशानी, कार्यों में बाधाएं, शरीर में रोग और दुश्मन से परेशानी                                रहती है।
  • 6ठा भाव               स्वस्थ शरीर, परिवार में खुशियां, धर्म में  रूचि और दुश्मनो पर विजय प्राप्त होती है।
  • 7वा  भाव              गरीबी, थकाने  वाली यात्राएँ, पेट के रोग, मानसिक परेशानी और मान सम्मान में  कमी                                   आती है
  • 8 वा  भाव              शरीर में रोग, परिवार में  झगडे, रोजगार में  परेशानी और पत्नी से मतभेद रहते हैं।
  • 9 वा  भाव              व्यवसाय और रोजगार मैं असफलता, दुर्घटना के योग, पारिवारिक कठिनाइयां, और                                        मानसिक तनाव रहता है।
  • 10 व भाव               कार्य बनते हैं, धन का लाभ, नौकरी में  तरक्की और व्यापार में लाभ होता है।
  • 11 वा भाव              समाज में सम्मान, यश, धन का लाभ, रोग से छुटकारा, कोई बड़ी सफलता मिलती है।
  • 12 व भाव               मानसिक तनाव, जीवन में सफलता और आर्थिक नुकसान होता है।   

जन्मकुंडली के 12 भावों में बुध का प्रभाव

                       जन्मकुंडली के 12  भावों में बुध का प्रभाव

अगर व्यक्ति की कुंडली के पहले भाव (लग्न) में बुध हो तो वह हसने हँसाने वाला, धार्मिक, बुद्धिमान, लम्बी आयु जीने वाला और स्त्रियों में लोकप्रिय होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 2 रे भाव में  बुध हो तो वह धनवान, साहसी, जीवन में  सुखी, सब से मीठा बोलने वाला और व्यव्हार कुशल होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 3 रे भाव में बुध हो तो वह चालाक, मेहनती, अच्छे गुणों वाला, धार्मिक, बहुत से दोस्तों वाला और व्यापार में सफल रहने वाला होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के  4थे भाव्   में बुध हो  तो वह दानी, विध्वान , लेखक होता है वह हर कार्य को जल्दी करने की कोशिश में  रहता है माँ से सम्बन्ध अच्छे होते हैं।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 5 वे भाव में बुध हो तो वह अच्छे गुणों वाला, हमेशा खुश रहने वाला, व्यापारी सुखी होता है उसके अंडर में बहुत से लोग काम करते हैं।
अगर व्यक्ति की कुण्डकी के 6 थे भाव में बुध हो तो वह अभिमानी, शरीर से कमजोर, बुद्धिमान और लड़ाई झगडा करने वाला होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 7 वे भाव में बुध हो तो वह धार्मिक, सुखी, लम्बी आयु वाला सुन्दर और धनवान होता है वह एक कुशल व्यापारी भी होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 8 वे भाव में बुध हो तो वह धनवान, अभिमानी, मानसिक तनाव में रहने वाला और दुखी स्वाभाव वाला होता है|।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 9 वे भाव में बुध हो तो वह भाग्यवान, विद्वान, धार्मिक, सदाचारी होता है।  उसे व्यापार में अच्छी सफलता मिलती है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 10 वे भाव में बुध हो तो वह व्यव्हार कुशल, माता पिता का सम्मान करने वाला, धनवान होता है। वह हमेशा सच का साथ देने वाला होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 11 वे भाव में बुध हो तो वह अच्छे विचारों वाला, ईमानदार, सुन्दर, धनवान, दुश्मनो का नाश करने वाला होता है वह समाज में सम्मानित होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 12 वे भाव में बुध हो तो वह दानी, आलसी, सुन्दर धार्मिक विचारों वाला और बहुत कम बोलने वाला होता है। 

Saturday, 2 January 2016

जन्म कुंडली के 12 भावों में मंगल का प्रभाव

                    जन्म कुंडली के 12 भावों में मंगल का प्रभाव

अगर व्यक्ति की कुण्डली के प्रथम भाव (लग्न) में मंगल हो तो व्यक्ति निर्धन, दुखी, साहसी, मेहनती होता है व्यवसाय में  ज्यादा सफल  नहीं रहते।  जीवन में दुर्घटनाओ की सम्भावना बनी रहती है पिता से सम्बन्ध ज्यादा अच्छे नहीं रहते।
अगर व्यक्ति की कुण्डली के 2 रे भाव में मंगल हो तो अधिक खर्च करने वाला, कड़वा बोलने वाला परिवार में  लड़ने झगड़ने वाला लेकिन धार्मिक प्रवर्ति वाला होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 3 रे भाव में मंगल हो तो वह साहसी, ताकतवर, धैर्य वाला और प्रसिध होता है लेकिन उसकी अपने बहनो और भाइयों से कम  बनती है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 4 थे भाव में मंगल हो तो व्यवसाय में  अच्छा लाभ कमाता है स्वाभाव से झगड़ालू होता है भाई बहनो और माँ से कम बनती है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के  5 वे भाव मे मंगल हो तो वह बुद्धिमान, शरीर से कमजोर मांसाहारी और शराब का सेवन करने वाला होता है ऐसा व्यक्ति किसी लम्बे रोग से पीड़ित होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली में 7 वे भाव में  मंगल हो तो वह धन को बर्बाद करने वाला, कड़वा बोलने वाला, गरीब और बात बात में  गुस्सा करने वाला होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 8 वे भाव में मंगल हो तो वह शर्मीले स्वाभाव का, कड़वा बोलने  वाला,धन की चिंता में डूबा रहने वाला होता है। ऐसे व्यक्ति को जीवन में  खून से सम्भंदित रोग हो सकते हैं।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 9 वे भाव में मंगल हो तो वह गुस्से वाला, किसी भी कार्य में सफल रहने वाला, जिद्दी, होता है पिता से सम्बन्ध अच्छे नहीं रहतें|
अगर व्यक्ति की कुंडली के 10 वे भाव में  मंगल हो तो वह धन से भरपूर, स्वाभिमानी, चालाक, सुखी होता है।  उसे समाज में  बहुत मान सम्मान मिलता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 11 वे भाव में मंगल हो तो वह अच्छी सम्पति का मालिक, जिद्दी, अभिमानी, बहुत गुस्से वाला, साहसी और झगड़ालू स्वाभाव वाला होता है।
अगर व्यक्ति की कुंडली के 12 वे भाव में मंगल हो तो वह कानो और आँखों का रोगी, निर्धन, गुस्से वाला, झगड़ालू, आय से अधिक खर्च करने वाला होता है ऐसे व्यक्ति पर कोई न कोई कर्ज जरूर रहता है। 

कालसर्प दोष और उसके उपाय

                               कालसर्प दोष और उसके उपाय

  • जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में सभी सातों गृह राहु और केतु के एक ही तरफ आ जाते हैं तो कालसर्प दोष कहलाता है। जब राहु और केतु के बीच में सभी गृह आ जाएँ और कुंडली का कोई भी भाव खाली न रहे तो पूर्ण कालसर्प दोष कहलाता है जब राहु और केतु के बीच से एक गृह बाहर आ जाता है तो आंशिक कालसर्प दोष कहलाता है और जब एक से ज्यादा गृह बाहर आ जाएँ तो कालसर्प दोष समाप्त माना  जाता है।  अगर कोई व्यक्ति बहुत मेहनत करता है लेकिन उसे उस मेहनत का पूरा फल नहीं मिलता या बहुत देर से मिलता है
  • यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में मृत्यु तुल्ये कष्ट भोग रहा हो।
  • यदि कोई व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों में घिरा रहता हो।
  • यदि किसी व्यक्ति के विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में बहुत लड़ाई झगडे होते हों।
  • यदि किसी व्यक्ति को संतान न होती हों या कन्या संतान ही हों  तो ऐसे व्यक्ति को अपनी कुंडली एक बार किसी योग्य व्यक्ति को जरूर दिखानी चाहिए क्योंकि हो सकता है कि  वह कालसर्प दोष से पीड़ित हो क्योंकि राहु और केतु के बीच में आने के कारण सभी गृह अपने पूरे फल देने में अस्मर्थ हो जाते हैं। उसे अपने अच्छे कर्मों का फल भी नहीं मिल पाता और वह पूरा जीवन दुर्भाग्य में  घिरा रहता है।
  • राहु और केतु दोनों छाया गृह हैं सर वाले भाग को राहु और धड़ वाले भाग को केतु कहा जाता है।  जो व्यक्ति कालसर्प दोष से पीड़ित होता है उसके जीवन में  जब भी राहु या केतु की दशा या अन्तर्दशा आती है  तो उसके जीवन में  कष्ट ओर  अधिक हो जाते हैं। कालसर्प दोष के कुछ उपाय हैं जिन्हे कर के आप उन कष्टों और प्रभावों को कम कर सकते हैं
  • राहु और केतु की वस्तओं  का दान करें जैसे काला  या सफेद कम्बल, काले तिल, सरसों का तेल नारियल आदि जितना हो सके अपने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करें।
  • शिवलिंग पर चांदी के नाग और नागिन का जोड़ा चढ़ाएं। ।

  • महामृत्युंजय मन्त्र का जाप करें।
  • हनुमान जी की पूजा करें।
  • सावन महीने के 30 दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
  • राहु और केतु के मन्त्रों का जाप करें।
  • कालसर्प योग यन्त्र के सामने सरसों के तेल का दिया जलाकर ओम नमः शिवाय का जाप करें।
  • ये कुछ उपाय दिए गए हैं इनमेँ जो भी संभव हो आप कर सकते हैं ।  

वास्तु शास्त्र के नियम

                                                     वास्तु शास्त्र के नियम

वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में  मंदिर हमेशा उत्तर पूर्व दिशा अर्थार्त ईशान कोण में  ही होना चाहिए क्योंकि उत्तर पूर्व दिशा में भगवान  विष्णु के साथ देवी लक्ष्मी का निवास होता है।
अगर ईशान कोण में  जगह न हो तो मंदिर उत्तर दिशा,  पूर्व दिशा या पश्चिम दिशा में बनाया जा सकता है।
शयन कक्ष में  कभी भी मंदिर नहीं बनाना चाहिए।
अपने पूर्वजों (मृत ) की तस्वीर कभी भी मंदिर में  नहीं लगानी चाहिए।
मकान में  रसोई घर हमेशा दक्षिण  पूर्व   में  होना चाहिए।
इसके अलावा उत्तर पश्चिम दिशा में  भी रसोईघर बनाया जा सकता है।
खाना खाने का कमरा पश्चिम दिशा में सबसे अच्छा माना जाता है।  अगर  पश्चिम में जगह न हो तो उत्तर में  भी  बनाया जा सकता है।
अच्छे स्वास्थ्य के लिए हमेशा दक्षिण की तरफ  सर रख कर सोएं ।                                                               घर की सभी खिड़कियां दिन में  एक बार जरूर खोलें। 
घर का टॉयलेट अगर उत्तर पूर्व दिशा में हो तो घर में लड़ाई झगडे, मानसिक तनाव और गरीबी  रहती है। 
घर की सीडी के नीचे पूजा घर या टॉयलेट नहीं होना चाहिए। 
रसोईघर और टॉयलेट आमने सामने नहीं होना चाहिए। 
रसोईघर मकान के मुख्य  दरवाजे के सामने नहीं होना चाहिए। 
यदि  तीन दरवाजे एक कतार में  हों तो बीच के दरवाजे पर सॉफ्टेक की माला टाँगे। 
जिस घर में लगातार लड़ाई झगडे होते हों और कार्य न बनते हों वहां घर के मुख्य दरवाजे पर विधन हर्ता गणपति की मूर्ति लगनी चाहिए। 
जिस घर में बच्चों की शादी में रूकावट आ रही हो वहां घर के मुख्य दरवाजे पर विवाह विनायक गणपति की मूर्ति लगानो चाहिए। 
जिस घर में धन की बरकत न रहती हो उस घर में धनदायक गणपति की स्थापना करनी चाहिए। 
कर्ज से मुक्ति के लिए ऋणमोचन गणपति की मूर्ति लगानी चाहिए।