Thursday, 31 December 2015

अंक ज्योतिष अनुसार नव वर्ष

                                             अंक ज्योतिष अनुसार  नव वर्ष


नवग्रह एस्ट्रोलॉजी की तरफ से आप सब को नए साल की बहुत बहुत शुभ कामनाये। परम पिता परमात्मा से प्राथना है की आप सब के जीवन में आर्थिक, शारीरिक और पारिवारिक उन्नति करें। आज हम आप को यह बताएंगे कि अंक ज्योतिष के हिसाब से  नव वर्ष 2016 आप के लिए कैसा  रहेगा।  वर्ष 2016 का योग 9  है जिसके स्वामी गृह मंगल हैं। आप अपने मूलांक के हिसाब से देख सकते हैं कि नया साल आप के लिए कैसा रहेगा।
मूलांक         स्वामी गृह               जन्म  की तारिख              वर्षफल
1                 सूर्य                        1, 10  और 28                   मध्यम फल रहेगा।
2                 चन्द्र                       २,  11, 20  और 29            मध्यम फल रहेगा।
3                 बृहस्पति                  3, 12, 21  और 30            शुभ रहेगा और उत्तम फल मिलेंगे।
4                  राहु                         4, 13 और 22                   मध्यम फल रहेगा।
5                  बुध                          5, 14 और 23                  मध्यम फल रहेगा।
6                  शुक्र                         6, 15  और 24                 शुभ रहेगा और उत्तम फल मिलेंगे।
7                  केतु                         7, 16  और 25                 अधिक शुभ नहीं रहेगा|
8                  शनि                        8, 17 और 26                  मध्यम फल रहेगा।
9                  मंगल                      9, 18  और 27                बहुत शुभ रहेगा और अति उत्तम फल                                                                                                  मिलने वाले हैं।



यह तो था आपकी शारीरिक, पारिवारिक उन्नति और वैवाहिक जीवन के लिए वर्ष 2016  कैसा रहेगा। अगर आप यह जानना चाहते हैं कि नया साल आपके लिए आर्थिक और धन सम्पति के मामले में कैसा रहेगा तो अपना पूरा नाम, जन्म की तारिख, महीना और वर्ष इसी ब्लॉग पर लिखें। 

नव वर्ष और आपका राशिफल

                         नव वर्ष और आपका राशिफल


  • नवगृह एस्ट्रोलॉजी की तरफ से आप सब को नव वर्ष 2016  की बहुत बहुत शुभ कामनायें। परम पिता परमात्मा से प्राथना है की नया साल आप सब के लिए शारीरिक,  आर्थिक और पारिवारिक उन्नति ले कर आये।  आज हम आपको 2016  के जनवरी माह का राशिफल बतायेंगे। 



  • मेष राशि (ARIES)  वालों को मानसिक परेशानी और चिंता बनी रहेगी, खर्चों का जोर रहेगा, धार्मिक कार्यों में  रूचि बढ़ेगी, संतान के स्वास्थय का ध्यान रखे और धर्म स्थान में  कम्बल का दान करें।



  • वृष राशि (TAURUS)  वालों को धन की हानि और खर्चों का जोर रहेगा लेकिन लाभ का मार्ग भी खुला रहेगा। स्वास्थ्य नरम रह सकता है नौकरी वालों की तरक्की हो सकती है। 



  • मिथुन राशि (GEMINI)  वालों के लिए यह माह कठिन रहेगा पारिवारिक तनाव,  आय में कमी,  नौकरी या व्यवसाय में  परेशानी और सर्दी जुकाम, खांसी की समस्या रह सकती है। 



  • कर्क राशि (CANCER) वालों को इस माह मे मेहनत अधिक करनी होगी, परिवार का सहयोग मिलेगा, मानसिक तनाव और आय मैं कमी रह सकती है किसी भी तरह के लड़ाई झगडे से बच कर रहें। 



  • सिंह राशि (LEO)  वालों को व्यवसाय में  लाभ होगा कार्य को बढ़ाने की योजना बनेगी अगर  नौकरी में हैं तो प्रमोशन हो सकती है कुल मिलाकर यह माह अच्छा गुजरने वाला है। 



  • कन्या राशि (VIRGO) वालों पर अचानक कोई खर्च आ सकता है परिवार में ख़ुशी का माहौल रहगा , सफलता मिलेगी और पूरा माह उत्साह बना रहेगा। 



  • तुला राशि (LIBRA) वालों को पारिवारिक खुशियां मिलेंगी, धन का लाभ कम  और खर्च ज्यादा रहेगा नौकरी  या व्यवसाय में  परेशानी रह सकती है और गुस्से से बचकर रहें। 



  • वृश्चिक राशि (SCORPIO)  वालों को धन का लाभ, नए कार्य बनेंगे, समाज में मान सम्मान बढ़ेगा  मानसिक तनाव रह सकता  है लड़ाई झगडे से दूर रहें। 



  • धनु राशि (SAGITTARIUS)  पारिवारिक कलह होने के योग हैं  आय मैं कमी रहेगी बनते हुए  कार्यों में रूकावटे आ  सकती हैं। 



  • मकर राशि (CAPRICORN) वालों के पारिवारिक मतभेद हो सकते हैं समाज में मान सम्मान बढ़ेगा लाभ कम  और खर्च अधिक रहने की सम्भावना है। 



  • कुम्भ राशि (AQUARIUS)  वालों को मानसिक तनाव हो सकता है बनते कार्यों में रूकावट रह सकती है  स्वास्थ्य  सम्बन्धी परेशानी हो सकती है। 



  • मीन राशि (PISCES) वालों के परिवार में ख़ुशी का माहौल रहेगा धन का लाभ होगा लेकिन परिश्रम अधिक करना होगा  अपने स्वास्थ्य का ध्यान रखें।  

Wednesday, 30 December 2015

मांगलिक दोष और उसकी समाप्ति

  •                                  मांगलिक दोष और उसकी समाप्ति

  • जब किसी की जन्म  कुंडली में मंगल गृह 1,  4,  7,  8 और 12 वे भाव में बैठा हो तो व्यक्ति मांगलिक कहलाता है और सलाह यही दी जाती है कि  मांगलिक लड़के या लड़की की शादी मांगलिक व्यक्ति से ही करनी चाहिए।  जब भी किसी माता पिता को यह पता लगता है की उनकी संतान मांगलिक है तो उनकी चिंता बहुत बढ़  जाती है क्योंकि मांगलिक रिश्ता ढूंढना कई बार बहुत बड़ी समस्या बन जाता है और कई बार अच्छे मांगलिक रिश्ते मिलने में ही इतना समय लग जाता है कि  लड़के या लड़की की उम्र काफी बाद जाती है।  कई अच्छे रिश्ते भी इस कारण  हाथ से निकल जाते हैं। यहाँ हम आपको जन्म कुंडली में  कुछ ऐसे संयोग बताएंगे जिससे मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर मेष लग्न  की कुंडली में लग्न  भाव में मंगल हो तो मंगल दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर जन्म  कुंडली में चौथे भाव में वृश्चिक राशि में मंगल हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर सातवें भाव में कर्क राशि में मंगल हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर 8 वे भाव में कुम्भ राशि में  मंगल हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर 12 वे भाव में  धनु राशि में मंगल हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर लड़के या लड़की की कुंडली में  किसी भी भाव में मंगल हो और दुसरे की कुंडली में उसी भाव में राहु,  केतु या शनि गृह हों तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर मंगल किसी भी भाव में अस्त  हो तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • अगर कुंडली के किसी भी भाव में  मंगल के साथ राहु, चन्दर्मा या बृहस्पति बैठ जाएँ तो मांगलिक दोष समाप्त हो जाता है।
  • तो यह हैं  जन्म कुंडली के ऐसे कुछ संयोग हैं जिनमे मांगलिक दोष समाप्त माना जाता है

जन्म कुंडली के 12 भावों में चन्दर्मा के फल

                   जन्म कुंडली के 12 भावों में चन्दर्मा के फल 

अगर  लग्न (पहले भाव) में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति आकर्षक व्यक्तित्व वाला, शर्मीला और धनी  होता है ऐसा व्यक्ति व्यापार  में अधिक सफल रहता है। 
अगर 2 रे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति भाग्यवान, बुद्धिमान, सुन्दर और सहनशील होता है ऐसे व्यक्ति की वाणी बहुत मीठी होतो है।  
अगर 3 रे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति धार्मिक, खुश रहने वाला और कंजूस प्रवर्ति का होता है ऐसे व्यक्ति के अपने भाई बहनो से बहुत अच्छे संबंध रहते हैं।                                                                                         अगर 4 थे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति को समाज में सम्मान, बुद्धिमान, सुखी और उच्च शिक्षा प्राप्त होता है ऐसे व्यक्ति के माँ से संबंध बहुत अच्छे रहते हैं। 
अगर 5 वे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति धार्मिक, शांत स्वाभाव और कम बोलने वाला होता है ऐसे  व्यक्ति का वैवाहिक जीवन अच्छा रहता है। 
अगर 6 ठे  भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति अधिक खर्च करने वाला, गुस्से वाला और आलसी  स्वाभाव का होता है ऐसा व्यक्ति  अपने दिमाग से धन कमाता है। 
अगर 7 वे भाव मे चन्दर्मा हो तो व्यक्ति फुर्तीला, अपने अभिमान में रहने वाला और धैर्य से जीने वाला होता है ऐसा व्यक्ति सफल व्यापारी होता है।  
अगर 8 वे भाव में  चन्दर्मा हो तो व्यक्ति स्वाभिमानी, अधिक बोलने वाला और नौकरी की अपेक्षा व्यापर में अधिक सफल रहने वाला होता है। 
अगर 9 वे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति अच्छी सम्पति का मालिक, साहसी, सुखी और मेहनती होता है ऐसे व्यक्ति की धार्मिक कार्यो में बहुत रूचि होती है। 
अगर 10 वे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति  खुश रहने वाला, दयालु स्वाभाव, शरीर से कमजोर और समाज में  सम्मान प्राप्त करने वाला होता है। 
अगर 11 वे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति दानी, अच्छी सम्पति वाला, समाज में लोकप्रिय और सुखी जीवन जीने वाला होता है । 
अगर 12 वे भाव में चन्दर्मा हो तो व्यक्ति  गुस्से वाला, चिंता मे घिरा रहने वाला, अधिक खर्च करने वाला होता है ऐसा  व्यक्ति अकेला रहना ज्यादा पसंद करता है। 

Tuesday, 29 December 2015

जन्म कुंडली के 12 भावों में सूर्य का फल

                                   जन्म कुंडली के 12  भावों में सूर्य का फल

अगर लग्न (पहले भाव) में सूर्य हो तो वयक्ति सम्पति का मालिक, साहसी, स्वाभिमानी  और शांत स्वाभाव वाला होता  है।

अगर 2 रे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति सम्पति वाला, अच्छे भाग्य वाला लेकिन झगड़ालू स्वाभाव का होता है उसकी अपने परिवार वालों से भी नहीं बनती।
अगर 3 रे भाव में  सूर्य हो तो व्यक्ति साहसी, प्रभावशाली होता है लेकिन अपने परिवार वालों के कारण  दुखी रहता है।
अगर 4 थे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति चिंताओं में  घिरा रहने वाला, कठोर और जिद्दी स्वाभाव वाला होता है।
अगर 5 वे भाव में  सूर्य हो तो व्यक्ति गुस्से वाला, दुखी, रोगी और गरीबी में  जीवन बिताने वाला होता है।
अगर 6   भाव में सूर्य हो तो  व्यक्ति साहसी, शत्रुओं का नाश करने वाला और निरोगी होता है।
अगर 7 वे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति व्यव्हार में खुश और मस्त रहने वाला, लेकिन वैवाहिक जीवन ज्यादा अच्छा नहीं होता।
अगर 8 वे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति चिंता में घिरा रहने वाला, दुखी, गुस्से वाला और निर्धन होता है।
अगर 9 वे भाव में  सूर्य हो तो व्यक्ति धार्मिक, दानी, बुद्धिमान और सीधे स्वाभाव का होता है।
अगर 10 वे भाव में  सूर्य हो तो व्यक्ति साहसी, चालाक, सम्पति वाला और व्यव्हार कुशल होता है।
अगर 11 वे भाव में  सूर्य हो तो व्यक्ति हर कार्ये  में सफल रहने वाला,  ताकतवर, धनी और स्वाभिमानी स्वाभाव का होता है।
अगर 12 वे भाव में सूर्य हो तो व्यक्ति आलसी, निर्धन, रोगी और उदास रहने वाला होता हैं। 

धनु राशि (SAGITTARIUS),मकर राशि (CAPRICORN), कुम्भ राशि (AQUARIUS),मीन राशि (PISCES)

                       
                                                               राशियाँ और उनके उपाय .
 धनु राशि (SAGITTARIUS)
गुरुवार का व्रत करें।
 हरिवंश पुराण का पाठ  करें।
पीला  रुमाल हमेशा अपने पास रखें।
घर  में  कोई भिखारी आये तो उसे खाली  हाथ न भेजें।

मकर राशि (CAPRICORN)
धर्म स्थान में  अखरोट का दान करें।
बंदरों को रोटी खिलायें।
गरीबो और कौओं को भोजन करायें।
लोहे की वस्तु  खुद न खरीदें।

कुम्भ राशि (AQUARIUS)
शनिवार का व्रत करें।
मासाहारी  भोजन न करें।
चांदी का टुकड़ा हमेशा अपने पास रखें।
भैरों मंदिर में शराब चढ़ाएं।

मीन राशि  (PISCES)
बृहस्पति  की वस्तूं  का दान करें।
केसर और हल्दी का तिलक करें।
माँ दुर्गा का पाठ करें।
पीपल पर दिया जलाएं। 

LEO,VIRGO,LIBRA AND SCORPIO

सिंह राशि (LEO)  
कोई भी शुभ कार्य मीठा खा  कर करें। 
दूध, चावल और चांदी का दान  करें। 
किसी से मुफ्त मे कोई वस्तु न लें। 
हमेशा चांदी  का एक सिक्का जेब मे रखेँ। 

कन्या राशि (VIRGO)
बुधवार का उपवास करें। 
दुर्गा सप्तशती का पाठ करें। 
 शनि की वस्तुओ का दान करें। 
किसी पर भी अधिक क्रोध न करें। 

 तुला राशि (LIBRA)
स्त्री जाती का सम्मान करें। 
पक्षियों और गायें को भोजन कराएं। 
मक्खन  और दही का दान करें। 
दिन मे  एक बार मंदिर का दर्शन  करें। 

वृश्चिक राशि (SCORPIO) 
मंदिर में बूंदी  का परशाद चढ़ा कर बाटें। 
गुड, चीनी या शक्कर चीटियों को खिलायें। 
हनुमान जी को सिन्दूर  और चोला चढ़ाएं। 
सुबह खाने मे सबसे पहले शहद का सेवन करें। 

Sunday, 27 December 2015

Rashian or Ratna

                                                       राशियाँ और उनके उपाय
मेष राशि (ARIES)
रात  के समय सिराहने एक गिलास पानी  भरकर रखें और सुबह उठ कर उस पानी को किसी गमले या पेड़ मै  डाल दें।
बाएं हाथ मे  चांदी  का छला  पहने।
लाल रंग का रुमाल हमेशा अपनी जेब मे रखें।
मुफ्त मे  किसी से कोई वस्तु  न लें।

मिथुन राशि  (TAURUS)
किसी को धीखा  न दें।
 घर में  मनीप्लान्ट  का पौधा जरूर लगाएं।
धर्म स्थान पर दुध, दही और घी का दान करें।
घर मे देसी घी का दिया रोज जलाएं।

मिथुन राशि (GEMINI)
बाएं हाथ मे  चांदी का छला धारण करें।
हरे रँग  के कपडे न पहने।
घर मे मनीप्लान्ट का पौधा न लगाएं।
सूर्य को जल चढ़ाएं।

कर्क राशि (CANCER)
गेहू, गुड और ताम्बा दान करें।
माँ से चांदी और चावल ले कर हमेशा अपने पास रखें।
माँ दुर्गा का पथ करें।
सफ़ेद रंग की वस्तुं  का व्यापार  न करें।  

मांगलिक दोष की समाप्ति {cancellation of Manglik Dosha )

Saturday, 26 December 2015

CAPRICORN , AQUARIUS AND PISCES

                                                      

मकर राशि (CAPRICORN)  12  राशियों मे मकर राशि दसवे नंबर पर आती है इस राशि के स्वामी गृह शनि हैं इस राशि मे जन्म लेने वाले व्यक्ति कम बोलने वाले और कम खर्च करने वाले होते हैं।  ये अपने विचारों और अपने आप मे मग्न रहने वाले लोग होते हैं।  इन्हे ताकत के दम पर नहीं प्यार से जीता जा सकता है।  ये किसी की भी मदद को त्यार  रहते हैं लेकिन कितनी भी कठिनाई हो किसी से मदद नहीं मांगते।  प्रेम संबंधों मे कम  ध्यान  देते हैं पर अपने परिवार और रिश्तों का बहुत ध्यान रखते हैं।  विपरीत सेक्स के लोगों से ज्यादा संपर्क मे नहीं रहते।  किसी भी कार्य मे असफल हो जाने पर ये बहुत निराश हो जाते हैं।  टेक्निकल और फाइनेंसियल कार्यों मे  ये बहुत सफल रहते हैं।  नौकरी मे उच्च पदों (HIGH POSTS)  पर रहते हैं।  नये  नये  दोस्त बनाना पसंद नहीं होता पर पुराने दोस्तों से पारिवारिक संबंध  रहते हैं।

कुम्भ राशि (AQUARIUS)  12 राशियों मे कुम्भ राशि 11 वे नंबर पर आती है इस राशि के स्वामी गृह शनि हैं इस राशि मे जन्म  लेने वाले व्यक्ति स्पष्ट बोलने वाले, दिल के साफ़, पढ़ने  लिखने मे रूचि रखने वाले  धार्मिक और  सज्जन प्रवर्ति के होते हैं।  ऐसे लोग प्रगतिशील विचारों वाले होते हैं। ये व्यक्ति कोई भी कार्य करने से  पहले कई बार सोचते हैं स्वभाव  से संकोची होते हैं।  धैर्य की भावना बहुत होती है और अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं।  धार्मिक कार्यों मे बहुत रूचि रखते हैं। गरीब लोगों  की बहुत मदद करते हैं।  प्रेम  आदि के मामलों मे ज्यादा सफल नहीं रहते।  परिवार से बहुत लगाव होता है। जिस तरह खुद  बुद्धिमान होते  हैं उसी तरह ये आशा करते हैं की उनका जीवन साथी भी उनकी तरह दिमाग से चलने वाला और शांत स्वभाव  वाला हो।

मीन राशि (PISCES)  12  राशियों मे मीन राशि 12 वे स्थान पर आती है इस राशि के  स्वामी गृह बृहस्पति हैं इस राशि मे जन्म  लेने वाले व्यक्ति कल्पनाओ मे जीने वाले, रोमांटिक और बेचैन स्वभाव  के होते हैं।  आत्मविश्वास  ज्यादा नहीं होता। कभी तो एकदम शांत और  एकदम गुस्से मे  रहते हैं।   अपने आप पर ज्यादा  भरोसा नहीं होता दूसरों की सलाह से  ज्यादा चलते हैं। दूसरो का भरोसा नहीं तोड़ते। अकेले रहना ज्यादा पसंद होता है दोस्तों  की संख्या कम  होती है।   भगवान पर बहुत आस्था होती है अंधविश्वासी भी बहुत होते हैं।  हमेशा  दूसरों की मदद करने के लिए त्यार रहत  हैं।  जीवन मे बहुत ज्यादा इच्छाएँ नहीं होती और प्रगति धीरे धीरे ही होती है।  दो व्यवसाय एक साथ करते हैं।  अगर  नौकरी मे हों तो अच्छे कर्मचारी साबित होते हैं। सुन्दर  जीवनसाथी पसंद   करते हैं और वैवाहिक जीवन बहुत अच्छा रहता है। 

SCORPIO AND SAGITTARIUS

                                                 राशियाँ और उनके प्रभाव

वृश्चिक राशि  (SCORPIO) - 12  राशियों मै वृश्चिक आठवें नंबर की राशि है इसके स्वामी गृह  मंगल हैं इस राशि मैं जन्म  लेने वाले व्यक्ति किसी के कार्यों मैं  दखल नहीं देते और न ही ये चाहते हैं कि  कोई उनके कामोँ  में दखल दे।  ये जल्दी किसी से मिक्स नहीं होते।  आत्मविश्वास से भरे हुए और साहसी होते हैं। काम  करने की अपार  शक्ति होती है कभी थकान महसूस नहीं  करते।  अपनी  मेहनत और साहस  के दम  पर धन कमाते हैं । कई बार इनके रूखे व्यव्हार के  कारण  लोग इनसे दूर  हो जाते हैं।  ये जिस  काम को करने की ठान ले उसे पूरा कर के ही छोड़ते हैं।   इनके  अंडर मे  काम करना बहुत कठिन होता  है।  सामाजिक कार्यों मे बहुत सक्रिय रहते हैं।  नेता,  सेना  और पुलिस की नौकरी में  सफल रहते  हैं।

धनु राशि (SAGITTARIUS)-  12  राशियों  मे धनु नौवे नंबर की राशि है जिसके स्वामी गृह बृहस्पति हैं।  इस राशि  में  जन्म  लेने वाले व्यक्ति धार्मिक प्रवर्ति के  होते हैं  ये पुरानी परंपराओं  को मानने  वाले होते हैं।  समय के अनुसार अपने को ढाल लेते हैं और  जीवन को  बिताते हैं। लड़ाई झगड़ों से दूर  रह कर शांत जीवन जीना पसंद  करते हैं।  आत्मविश्वास, अनुशासन और  मेहनत से जीवन मे सफलता प्राप्त करते हैं। किसी भी कार्य को अधूरा नहीं छोड़ते।  इन्हे जीवन मे पैतृक सम्पति प्राप्त होती है।  इनकी कोशिश हमेशा यही रहती कि  किसी  का भी भरोसा न तोडे। सरकारी कार्यों मे ठेकेदारी, अध्यापक, जज  और वकील जैसे कार्यों मे  सफल रहते हैं। 

VIRGO and LIBRA

                                                     राशियाँ  और उनके प्रभाव

कन्या राशि (VIRGO)   12 राशियों में कन्या छठे नंबर  की राशि है इसके स्वामी गृह बुध हैं इस राशि में जन्म लेने वाले व्यक्ति  बहुत बुधिमान  लेकिन भावनाओ में  बह  कर काम करने वाले होते हैं।  आत्मविश्वास की कमी   होती है पर कोई भी कार्य सोच समझ कर करते है।  कोई परेशानी न होते हुए भी ऐसे लोग परेशान नजर आते हैं  दूसरों की कमियां  निकालने  का बहुत शौक होता है।  ज्यादा कमाने वाले और कम खर्च  करने वाला स्वभाव होता है।  अपनी मेहनत से जीवन में सम्पति बनाते हैं।  अपनी नौकरी और व्यवसाय में सफल रहते हैं।  कई बार मैरिज देर से होती है लेकिन मैरिज लाइफ अच्छी रहती है।  अपने स्वास्थय के प्रति बहुत सावधान रहते हैं।  कई बार इन्हे जीवन में  अचानक बहुत बड़ा लाभ होता है।

तुला राशि (LIBRA)  12  राशियों में  तुला सातवें नंबर की राशि है इसके स्वामी गृह शुक्र  हैं इस राशि में जन्म  लेने वाले व्यक्ति भावुक स्वभाव  के होते हैं और ये अपने से ज्यादा अपने परिवार और बच्चों का ध्यान रखते हैं।   दिल से नम्र और दयालु होते हैं इनका गुस्सा बहुत जल्दी शांत हो जाता है  कोई भी कार्य करने से पहले अच्छी तरह सोचते हैं।  दूसरों के धन को  पाने की इच्छा मन मैं  रहती है घूमने का बहुत शौक होता है। उच्चकोटि का जीवन जीना चाहते हैं।  ये जीवन मे  हर वस्तु बढ़िया क्वालिटी की चाहते हैं चाहे फिर कपडे हों या वाहन ।   बिज़नेस मे अच्छे पार्टनर साबित होते हैं।  बातों के बहुत धनी  होते हैं इस कारण अपोजिट सेक्स वालों मे  बहुत लोकप्रिय होते हैं।   

CANCER AND LEO

                                             राशियाँ  और उनके प्रभाव 

कर्क राशि (CANCER)  12 राशियों में ये चौथे नंबर की राशि है इस राशि  में  जन्म लेने वाले व्यक्ति कल्पनाओ में  जीने वाले होते हैं हर माहौल में अपने को ढाल  लेते हैं।  जीवन में  मेहनत से ही धन कमा  पाते हैं इनमेँ धैर्येकी   बहुत कमी होती है गुस्सा  आता है और बहुत  जल्दी ठंडा हो जाता है मूड बहुत जल्दी जल्दी बदलता  रहता है।  इस राशि के स्वामी गृह  चन्दर्मा हैं जिस   प्रकार चन्दर्मा का  आकार  घटता बढ़ता रहता है उसी प्रकार इनके अंदर कॉन्फिडेंस का लेवल भी घटता बढ़ता रहता है जीवन में  कई बार तो ये बहुत बड़े बड़े कार्य कर लेते हैं  बार एक छोटा सा काम  इन्हे कठिन लगता है।  स्वभाव  से बैचैन रहते हैं। अपने परिवार के प्रति समर्पित होते हैं। किसी के आगे झुकना थोड़ा कठिन लगता है  विपरीत सेक्स के प्रति बहुत आकर्षित होते हैं।  नौकरी में ज्यादा तरक्की  हैं और व्यापर में खाने पीने का व्यापार  इनके लिए शुभ रहता है।  

सिंह राशि  (LEO)  12  राशियों में पांचवे नंबर  की राशि है इस राशि के स्वामी गृह सूर्ये  देव हैं इस राशि में  जन्म  लेने वाले व्यक्ति शांत स्वाभाव के होते हैं।  इनमे आत्मविश्वास और धैर्य की भावना बहुत अधिक होती है जिसके दम पर ये बड़े से बड़े कठिन कार्य करने में  सफल होते हैं।   इन्हे गुस्सा बहुत कम आता है लेकिन जब आता है तो तूफ़ान की तरह आता है।  इनमें शारीरिक और मानसिक ताकत बहुत होती है।  इनका व्यक्तित्व बहुत प्रभावशाली होता है।  जिस तरह सिंह (शेर) जंगल का राजा होता है इसी तरह ये भी राजा की तरह जीवन बिताते हैं कम इनकम होने पर भी ये अपनी शान में  कोई कमी नहीं आने देते।  ऐसे जातक सरकारी नौकरी,  प्रशासनिक अधिकारी, सेना  या पुलिस में  सफल रहते  हैं। 


RASHIAN OR UNKE PRABHAV

                                                         
                                                   राशियाँ  और उनके प्रभाव 
मेष राशि (ARIES)  ज्योतिष शास्त्र में कुल 12  राशियाँ  होती हैं इनमे सबसे पहली राशि मेष है इस राशि के स्वामी गृह मंगल हैं। इस राशि में  जन्म  लेने वाले व्यक्तियों मैं मंगल गृह का प्रभाव पाया जाता है ऐसे लीग साहसी, स्पष्ट बोलने  वाले, अपनी बात पर अड़े रहने वाले और उत्साह से जीने वाले होते हैं।  ये लोग बहुत महत्वकांशी (Ambitious) होते हैं।  इनमेँ हर बात बात पर  विवाद करने की बहुत क्षमताहोती  है जीवन की शुरुआत में  इन्हे बहुत संघर्ष करने पड़ते हैं। इन्हे ऐसे काम करने अच्छे लगते हैं जो कि क्म  अवधि के हों ज्यादा लम्बे  समय तक चलने वाले काम इन्हे पसंद नहीं आते और हर काम को जल्दी निबटाने की कोशिश करते हैं।  परेशानियों का   सामना करने में सक्षम लेकिन अगर परेशानिया लम्बे समय तक चलें तो ये निराश हो जाते हैं।  इनके व्यक्तित्व (personality)  में  एक आकर्षण होता है जिससे विपरीत सेक्स वाले इनसे बहुत जल्दी प्रभावित होते हैं।  प्रेम  संबंधो  में  ज्यादा सफल नहीं होते लेकिन अपने परिवार से बहुत लगाव होता है और हमेशा अपने परिवार के साथ रहना पसंद करते हैं। यइ लोग अच्छे भोजन और अच्छी नींद के बहुत शौकीन होते हैं। 

वृष राशि (TAURUS) - 12 राशियों में यह दुसरे नंबर की राशि है इस राशि के स्वामी गृह शुक्र हैं इस राशि मैं जन्म  लेने वाले व्यक्तियों के स्वभाव  को समझना थोड़ा कठिन होता है ये लोग खर्च करने में बहुत सावधान और धन को जोड़ कर रखने वाले होते हैं।   ये व्यक्ति आत्मनिर्भर और हर कार्य को ख़ुशी से  करते हैं।  इनका जीवन को जीने और कार्य करने का एक अलग स्टाइल होता है। ये अपने दोस्तों और प्रेमीजनों को हमेशा खुश रखने की कोशिश करते हैं इस कारण इनकी मैरिज लाइफ अच्छी चलती है।  इस राशि वाले लोग उच्च पदो (High posts) पर जाते हैं, एक्टिंग, मीडिया, फिल्म निर्माण, संगीतकार, ज्वेलरी, सौंदर्य प्रसाधन आदि का  व्यापार  इनके लिए शुभ  होता है। 

मिथुन राशि (GEMINI) -  12  राशियों में यह तीसरे नंबर की राशि है इस राशि के स्वामी गृह बुध है इस रही में जन्म  लेने वाले जातक धार्मिक प्रवर्ति के होते हैं और संकट के समय इन्हे ईश्वर की मदद प्राप्त होती है।  इनमेँ  धैर्य की कमी होती है और स्वभाव  से बैचैन रहते हैं जीवन में धोखाधड़ी के कारण हानि उठानी पड़ती है।  ये लोग समय  के हिसाब से अपने आप को ढाल लेते हैं पर इनका मूड बहुत जल्दी जल्दी बदलता रहता है  इनमें आत्मविश्वाश की थोड़ी कमी होती है बोलने की कला बहुत होती है अपनी बातों से सामने वाले को प्रभावित कर लेते हैं ।  इन्हे नौकरी में  ज्यादा सफलता  नहीं मिलती कई बार जीवन में  दो व्यवसाय एक साथ करते हैं  और किसी महिला के कारण हानि उठानी पड़ती है।  सामाजिक और धार्मिक कार्यों में  हिस्सा लेते हैं और समाज में  सम्मान प्राप्त होता है।

क्या आप जानते हैं कि आप की कौन सी राशि है क्योंकि राशि के  अनुसार ही व्यक्ति का स्वाभाव और उसका व्यवसाय  आदि होता है।  व्यक्ति के जन्म के समय चन्दर्मा जिस राशि में  होते हैं वही व्यक्ति की राशि होती है  अगर आप अपनी सही राशि के बारे में जानना चाहते हैं तो अपने जन्म का दिन,  महीना,  वर्ष,  जन्म का समय और जन्म स्थान इसी ब्लॉग पर हमें भेजें। 


Friday, 25 December 2015

CHANDRMA SE BANNE WAALE YOG

                                                चन्दर्मा से बनने वाले योग 

यदि व्यक्ति की कुंडली में  सूर्य को छोड़ कर कोई और गृह चन्दर्मा से दूसरे भाव में  बैठा हो तो सुनफा योग बनता है ऐसे योग में जन्म लेने वाले जातक को राजा ली तरह सम्मान मिलता है ये व्यक्ति धनी और प्रतिष्ठा से अपना जीवन बिताते हैं। 

यदि व्यक्ति की जन्म  कुंडलीु में  सूर्य को छोड़ कर कोई दूसरा गृह चन्दर्मा से 12 वे भाव  में  बैठा हो तो अनफा योग बनता है इस योग में  जन्म  लेने वाला व्यक्ति पूरा जीवन रोग मुक्त,  सुखी और राजा के समान जीवन जिएगा। 

यदि व्यक्ति की कुंडली में  सूर्य को छोड़ कर कोई दूसरा गृह चन्दर्मा से 2 रे और 12 वे भाव में  बैठा हो तो दुर्धरा योग बनेगा इस योग में  जन्म  लेने वाला व्यक्ति को नौकरों और वाहन आदि का सुख मिलता है ऐसे जातक सब सुखों को भोगते हुए अपना जीवब बिताते हैं। 

यदि व्यक्ति की जन्म  कुंडली में चन्दर्मा से छठे, सातवें  और आठवें भाव में शुभ गृह हों तो चन्द्रधि योग बनता है जो जातक इस योग में जन्म लेते हैं वे राजा, मंत्री या सेना में  कोई बड़े पद (पोस्ट) पर बैठता हैं और वह सारा जीवन रोगों से मुक्त रहता है। 

क्या आप जानते हैं कि आपकी जन्म  कुंडली में कौन सा योग बन रहा है यदि नहीं तो अपना जन्म  का दिन, वर्ष, महीना, समय और स्थान इसी ब्लॉग पर भेजें। 

SURYA SE BANNE VALE YOG

                                                         सूर्ये से बनने वाले योग

यदि व्यक्ति की जन्म  कुंडली में जहाँ सूर्य  हो उससे दूसरे भाव मैं चंदर्मा  को छोड़ कर कोई दूसरा गृह बैठा हो तो ज्योतिष शास्त्र में  इसे  वैसी  योग कहते हैं इस योग में पैदा होने वाले जातक  साहसी स्वाभाव के, खुश रहने वाले, मीठे बोल  वाले और लम्बे शरीर वाले  हैं।

यदि  व्यक्ति की कुंडली में  जहाँ सूर्य  बैठा  हो उसके 12 वे भाव में  चंदर्मा  को छोड़ कर कोई दूसरा गृह बैठा हो तो कुंडली में वासी योग बनता है इस योग में जन्म  लेने वाले जातक प्रभावशाली और धनवान होते हैं।

यदि व्यक्ति की कुंडली में  जहाँ सूय बैठा हो उसके दुसरे या 12 वे भाव  में  चंदर्मा  को छोड़ कर कोई अन्य शुभ  गृह बैठा हो तो उभयचारी योग बनता है इस योग में जन्म  लेने वाले जातक  धनी  और सुखी जीवन बिताते  हैं  इन जातकों को राजा के समान  जीवन होता है यदि इन्ही भावों में अशुभ गृह स्थित  तो  व्यक्ति धन से पूरा जीवन परेशान रहता है और जीवन में  अपमान और  पीड़ा बहुत होती है।

यदि व्यक्ति की जन्म  कुंडलीु  में  सूर्य  और  बुध  गृह  एक ही भाव में  स्थित हों तो जातक  कुंडलीु में  बुध अदित्य  बनता है इस  में  जन्म  लेने  व्यक्ति धनवान,  सुखी जीवन,  बुद्धिमान होता है।  ऐसे व्यक्ति को जीवन में  बहुत सम्मान  है लेकिन इस योग के लिए बुध गृह अस्त  नहीं होना चाहिए।

क्या आप जानते हैं की आपके जीवन में  और आपकी  जन्म  कुंडली   में  कौन सा राजसी योग बन रहा है  अगर जानना चाहतें हैं तो अपना जन्म का दिन, जन्म का वर्ष, समय  और स्थान इसी ब्लॉग पर भेजें।


JANAM KUNDLI

जन्म कुंडली में  कुल 12  भाव होते हैं और हर भाव में व्यक्ति के जीवन की अलग अलग बातों का पता लगता है  जन्म कुंडली के प्रथम (पहले) भाव को लग्न कहा जाता है।  लग्न में व्यक्ति के शरीर, स्वास्थय, पर्सनैलिटी, स्वाभाव, चरित्र और मान सम्मान देखा जाता है।
दूसरे भाव में परिवार,  सम्पति,  बोलने का ढंग,  जीभ,  दाहिनी आँख आदि के बारे में देखा जाता है।
तीसरे भाव में  साहस ,  रिश्ते,  छोटे भाई बहन,  दायां  कान, सीना,  शिक्षा, बुधि आदि के बारे में देखा जाता है।
चौथे भाव में  घर का माहौल, माँ से सम्बन्ध, वाहन, आवास,  भूमि, प्रेम सम्बन्ध आदि के बारे मैं देखा जाता है। पांचवे भाव में  जीवन के सुख,  संतान,  यश,  जीवन स्तर, पद प्रतिष्ठा और सफलता आदि देखी  जाती है।
छठे भाव में  कर्जा,  रोग,  जीवन के अभाव,  चोट,  शत्रु,  भोजन और बदनामी आदि के बारे में देखा जाता है।
सातवें भाव में पति  पत्नी के सम्बन्ध, काम शक्ति,  पार्टनरशिप,  यात्राएँ,  यौन रोग आदि के बारे में देखा जाता है
आठवें भाव में  मृत्यु का प्रकार, आयु,  दुर्घटनाएं,  पैतृक सम्पति,  चिंता,  जीवन में रुकावटें आदि के बारे मैं देखा जाता है।
नौवें भाव में  धर्म,  सौभाग्य,  चरित्र,  दादा दादी,  उच्च शिक्षा,  तीर्थ यात्राओं के   बारे में देखा जाता है।
दसवे भाव में  उन्नति,  व्यवसाय,  अधिकार,  सफलता,  पिता,के  बारे में देखा जाता है।
ग्यारवे भाव में समृधि,  लाभ,  मित्र,  बड़ा भाई,  रोग से मुक्ति आदि के बारे में देखा जाता है।
बाहरवें भाव में  खर्चे,  हानि,  दंड,  कारावास, विदेश यात्रा,  लम्बी यात्राएँ,  विवाह आदि के बारे में देखा जाता है। 

Thursday, 24 December 2015

MOOLANK 9

                                                                मूलांक  9 


जिन जातकों का  जन्म  किसी भी माह की 9, 18  या 27  तारिख को हुआ हो उनका मूलांक 9  होता हैं मूलांक 9 के स्वामी गृह मंगल हैं और देवता हनुमान जी हैं। 
स्वभाव   9  तारिख को जन्म  लेने वाले व्यक्तियों में रिस्क लेने की क्षमता बहुत होती है गुस्सा बहुत आता है परिवार और भाई बहनो का बहुत ध्यान रखते हैं दिल में  जो भी बात हो एकदम साफ़ बोल देते हैं। 
18  तारिख को जन्म लेने वाले व्यक्तियों के अपने पिता से अक्सर वैचारिक मतभेद रहते हैं ये किसी भी नियम को कम ही मानते हैं। 
27 तारिख को जन्म  लेने वाले व्यक्ति दिल के साफ़ होते हैं इमोशनल होते हैं अपनी माँ से बहुत अटैच्ड होते।  हैं गुस्सा कम आता है और आये भी तो जल्दी ठंडा हो जाता है। 
मूलांक 9  वालों में काम करने की क्षमता बहुत होती है काम करते पहले हैं और उसके रिजल्ट के बारे में बाद में  सोचते हैं।  मूलांक 9  वालों पर मंगल का प्रभाव बहुत अधिक होता हैं ये लोग बहुत हिम्मत वाले होते हैं और जीवन में कठिनाइयों से कभी नहीं घबराते।  स्वाभाव में तेजी और जल्दबाजी बहुत होती है जीवन में संघर्ष बहुत होते हैं ऐसे लोगों को क्रोध बहुत जल्दी आता है और अगर कोई इनकी बुराई करे तो इनसे  सहन नहीं होता।  इन्हे अपनी तारीफ करने वाले लोग बहुत पसंद होते हैं अपने क्रोध के कारण कई बार ये अपने रिश्तों को खराब कर लेते हैं। मंगल गृह को सभी नव ग्रहों में सेनापति माना जाता हैं इस प्रकार मूलांक 9 वालों की इच्छा यही होती है की वो समाज में और कार्य करने वाली जगह पर सेनापति या मुखिया की तरह रहें।  ये व्यक्ति अपने जीवन मै  जो भी पाना चाहते हैं उसके लिए संघर्ष करते रहते हैं शुरू में  इन्हे बहुत कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है पर  अपने आत्मविश्वास के दम  पर ये सफलता प्राप्त कर लेते हैं।  यदि इनके कार्यों में  कोई दखल दे तो इनसे सहन नहीं होता ।  कई बार अपने ही परिवार वालों से इनकी कम बनती है।  अंक 3  और 6 इनके मित्र अंक हैं और  अंक 1  और 7  इनके शत्रु अंक है।  आराम करना इन्हे बहुत पसंद होता है नये नये  लोगों से मिलना बहुत अच्छा  लगता है।  अपने जीवन को शाही अंदाज से जीना पसंद करते हैं।  आगा ऐसे लोग अपनी साफ़ बोलने की आदत  और अपने गुस्से को कम कर लें  तो अपने रिश्तों और अपने जीवन में अधिक उन्नति कर   सकते हैं। 

शिक्षा   इनमें सीखने की इच्छा बहुत होती है विज्ञानं के क्षेत्र में बहुत रूचि होती है। 

पारिवारिक सम्बन्ध   यह  लोग ऐसे दोस्त और लाइफ पार्टनर को पसंद करते हैं जो हमेशा इनकी बात को माने जीवन मैं प्रेम सम्बन्ध  ज्यादा लम्बे समय तक नहीं चलते। अपने  स्वभाव के कारण मूलांक 9  वाली महिलाएं जल्दी टेंशन  में आ जाती हैं।  भाई बहनो का बहुत ध्यान रखते हैं रिश्तों में  इन्हे मान सम्मान कम ही मिलता है  
रोजगार   पुलिस, सेना  सर्जन होटल व्यवसाय, सर्जिकल का सामान, ठेकेदारी, प्रॉपर्टी से जुड़े काम इनके लिए शुभ होते हैं। 

शुभ दिन   तारिख 9, 18  और 27  
 शुभ वॉर   मंगलवार,  गुरुवार और शुक्रवार 

 जीवन के शुभ वर्ष 9, 18, 27, 36, 45, 54, 63  और 72 वा  वर्ष 
  शुभ धातु   ताम्बा           शुभ रत्न    मूंगा 

दान के  लिए  पदार्थ ताम्बा, गेहूं, लाल वस्त्र, लाल फूल और मसूर  की दाल। 

मंगल का मंत्र   ओम क्राम कर्रिम  क्र्रोम  सै   भौमाय नमः 
                                                           जय बाबा बजरंगबली 

Wednesday, 23 December 2015

MOOLANK 8

                                                                 मूलांक  8


ऐसे जातक जिनका जन्म किसी भी माह की 8, 17 या 26  तारिख को हुआ हो उनका मूलांक 8  होता है । जिनके स्वामी गृह शनि देव हैं।
स्वाभाव  8 नंबर वालों में किसी कार्य को सीखने  की क्षमता बहुत होती है इमोशनल बहुत होते हैं किसी भी कार्ये में सफलता देर से मिलती है।
17  नंबर वालों इमोशनल होते हैं ऐसे कई लोगों को जीवन में माँ का प्यार नहीं मिल पाता।
26  नंबर वालों को पार्टनरशिप में काम नहीं करने चाहिए कई केस में मैरिज लाइफ अच्छी नहीं रहती।
मूलांक 8 का स्वामी शनि है जिस प्रकार शनि देव बहुत धीरे धीरे  चलते हैं एक राशि से दूसरी राशि में आने में ढाई साल लगा देते हैं इसी प्रकार  ये जातक अपने जीवन में  धीरे धीरे उन्नति करते हैं। इन्हे अपने जीवन में  बहुत संघर्ष करना पड़ता है और बहुत कठिनाइयां उठानी पड़ती हैं। कठिनाइयों और संघर्षों से जूझ कर इन्हे जीवन में सफलता मिलती है बार बार असफल होने पर कभी कभी इनके मन में निराशा के भाव जरूर आ जाते हैं।  ऐसे लोग बहुत मेहनती  होते हैं और ज्यादा समय अपने काम में लगे रहते हैं। रिश्तों और प्रेम में दिखावा कम करते हैं इस कारण  लोग इनको रूखे स्वाभाव का मानते हैं जबकि दिल से ये बहुत भावुक और दयालु होते हैं।  मूलांक 8  वालों को लगता है कि वो दूसरे लोगों से अलग हैं कई बार ये जीवन में  बहुत अकेलापन महसूस करते हैं ये किसी के साथ कितनी भी भलाई कर लें इन्हे उसका रिजल्ट कभी नहीं मिलता|।  ऐसे व्यक्ति जीवन में या तो पूरी सफलती प्राप्त करते हैं या पूरी तरह असफल रहते हैं।  जीवन में आगे  बढ़ने की कोशिश मे हमेशा लगे रहते हैं इनके काम करने के तरीके को हर कोई नहीं समझ पाता। मूलांक 8 वाले    कई बार आलस के कारण    अपने  जीवन में असफल रहते हैं।  कई लोगों का बचपन बहुत कष्ट में बीतता है। 

पारिवारिक  संबंध   दोस्तों की संख्या कम् होती है रिश्तों और दोस्तों में रिज़र्व रहते हैं बहुत कम लोग ऐसे होते हैं जिनसे ये खुल  पाते हैं पिता से संबंध बहुत अच्छे नहीं रहते।   मूलांक 4 वालों से  इन्हे जीवन में  बहुत  परेशानी  उठानी  पड़ती है। 

व्यवसाय  या नौकरी  अपने मेहनती  सवभाव के कारण नौकरी में उच्च पद  पर पाये जाते हैं जज, डॉक्टर, कंपनी  के हैड।  व्यवसाय में कंस्ट्रक्शन कंपनी, लकड़ी का सामान, लोहे का सामान आदि। इन्हे व्यवसाय में तरक्की  बहुत धीरे धीरे  मिलती हैं। 

सेहत  जोड़ों के दर्द, सूखी  खांसी, मानसिक तनाव और लम्बे समय तक होने वाले रोग हो सकते हैं। 

शुभ दिन   8,  17  और 26  तारिख    शुभ वार   शनिवार, रविवार और सोमवार। 
जीवन के शुभ वर्ष  8, 17, 26, 35, 44, 53, 62  और 71 वा वर्ष। 
शुभ  रत्न  नीलम या नीली        शुभ धातु लोहा  त्रिधातु 
दान  की वस्तूएँ   तिल,  उड़द की दाल,  लोहा,  सरसो का तेल, काले वस्त्र आदि। 
शनि मंत्र   ओम प्रांग प्रिन्ग प्रोन्ग सै शनये नमः। 


अंक ज्योतिष  तीन चीजो पर आधारित होती हैं जन्म का दिन, जन्म   वर्ष और आपका नाम। जन्म के दिन से मूलांक जन्म वर्ष से भाग्यांक  निकाला  जाता है और आपके नाम के नंबर के साथ इन्हे मिलाया जाता है  अगर आप यह  जानना चाहते हैं की आपका नाम आपके मूलांक और भाग्यांक के साथ मैच करता है या नहीं तो अपना पूरा नाम और जन्म का दिन \और वर्ष  नीचे कमेंट  में लिखे । 

                                                  
                                                       ओम नमः शिवाय 

Monday, 21 December 2015

MOOLANK 7

                                                             मूलांक  7

ऐसे व्यक्ति जिनका जन्म  किसी भी माह की 7, 16 या 25 तारिख को हुआ हो उनका मूलांक 7  होता है जिसके स्वामी गृह केतु हैं
स्वभाव   मूलांक 7  में 7  तारिख को जन्म लेने वाले व्यक्ति जल्दी से किसी से अटैच्ड नहीं होते और अगर होते हैं तो दिल से होते हैं
16  तारिख को जनम लेने वाले लोगों की  कई बार मैरिज लाइफ अच्छी नहीं रहती और मैरिज देर से होने की उम्मीद होती है।
25  तारिख को जन्म  लेने वाले लोग अपने जन्म स्थान से दूर जाकर जीवन में  तरक्की करते हैं।
मूलांक 7  वाले लोगों के स्वभाव को समझना थोड़ा कठिन होता है।  ये लोग किसी से ज्यादा घुलमिल कर नहीं रहते। ये लोग कभी बहुत ज्यादा एक्टिव और कभी एकदम सुस्त हो जाते हैं।  ऐसे लोग अकेले रहना ज्यादा पसंद करते हैं। आर्थिक रूप से ये लोग ज्यादा सफल नहीं होते और जीवन में ज्यादा धन नहीं जमा कर पाते।  घूमने फिरने के बहुत शौकीन होते हैं ये ऐसे कार्यों में सफल भी होते हैं जिनमें घूम कर काम करना हो। मूलांक 7 वाली महिला का विवाह अपने से धनी परिवार में होने का चांस होता है ।  मूलांक 7 वाले अपने कार्यों की प्लानिंग तो बहुत करते हैं लेकिन प्रैक्टिकली उस पर काम नहीं कर पाते। मेहनत के काय  करना इन्हे पसंद नहीं होता।  तारिख 2, 11, 20 और 29  को जन्म लेने वाले लोगों से इनकी अच्छी बनती है  कई बार ये लोग अपने आप को बहुत बेचैन महसूस करते हैं।
शिक्षा  इन्हे पढ़ाई के साथ साथ कोई एक शौक जरूर होता है और कई बार इसी शौक को ये अपना व्यवसाय बना लेते हैं
पारिवारिक सम्बन्ध  भाई बहनो से सम्बन्ध अच्छे रहते हैं अगर ये छोटे होंगे तो बड़े भाई बहनो से मदद लेते रहेंगे।  दोस्तों की संख्या ज्यादा नहीं होती  अपने गंभीर स्वभाव  के कारण ये लोग प्रेम में  दिखावा नहीं कर  पाते  प्रेम संबंध ज्यादा लम्बे और स्थाई नहीं होते।
यात्राएँ  यह  लोग अपने जीवन में यात्रा बहुत करते हैं इन्हे जीवन सफलता भी अपने घर से दूर रह कर मिलती है । कई बार विदेश में जाकर भी कार्य करते हैं।
व्यवसाय   लिक्विड से सम्बंधित व्यवसाय , केमिस्ट, टीचर,प्रोफेसर, जज आदि हो सकते हैं।
सेहत  विल पावर कमजोर होती है कोई भी काम इनकी इच्छा के अनुसार न हो तो ये निराश हो जाते हैं।  वहमी  स्वाभाव के होते हैं खाने की वजह से सेहत ख़राब रहती है।  बार बार मोशन्स, कफ, खांसी, त्वचा रोग पेट  से सम्भंदित रोग हो सकते हैं।
शुभ दिन  7, 16, 25              शुभ वॉर   रविवार और सोमवार
जीवन के शुभ वर्ष 7, 16, 25, 34,  43, 52 , 61  और 70 वा  वर्ष।
शुभ रत्न   लहसुनिया             शुभ धातु     चांदी
दान की वस्तु   काले तिल, काला वस्त्र, कम्बल, उरद की दाल और तेल आदि।
केतु मंत्र  ओम सृंग श्रृंग स्रोंग  सै केतवे नमः

अगर आप अपनी कोई भी सलाह या प्रशन पूछना चाहते हैं तो इसी ब्लॉग पर पूछ सकते है आपके प्रश्नो और आपकी सलाह  का स्वागत
                                                  ओम नमः शिवाय 

Sunday, 20 December 2015

GRAHON KE PRABHAV OR UNKE UPAYE

                                        ग्रहों के अशुभ प्रभाव और उनके उपाय



  • ग्रहों के शुभ और अशुभ प्रभाव मानव के जीवन पर पड़ते रहते हैं । अशुभ प्रभावों से बचने के लिए कई तरह के उपाय करने को कहा जाता है जैसे गृह का मंत्र जाप, गृह का रत्न और गृह की वस्तुं  का दान।  वैसे तो जन्मपत्री देख कर पता चल जाता है कि कौन सा गृह अशुभ स्थिति में है लेकिन अगर जन्मपत्री न भी हो तो ग्रहों के अशुभ प्रभावों को देख कर तय किया जाता है कि किस गृह के अशुभ प्रभाव पड़ रहे हैं यहाँ आपको इन्ही अशुभ प्रभावों और उनके उपायों के बारे में बताया जायेगा।



  • सूर्य के अशुभ प्रभाव से सरकारी कार्यों में, सरकारी नौकरी में परेशानी होती है पिता से सम्बन्ध ख़राब हो जाते हैं या पिता की सेहत ख़राब रहती है दिल के रोग, त्वचा के रोग, आँखों के रोग, पीलिया आदि  हो सकते हैं। उपाय  पिता का सम्मान करें, सूर्य यन्त्र की पूजा करें, ताम्बा गेहुँ और गुड़  का दान करें सूर्य को जल चढ़ायें।

         सूर्य मंत्र    ओम हरंग हरिंग हरोंग सै सूर्याय नमः।


  • चन्द्र  के अशुभ प्रभाव में मानसिक परेशानियां, नींद न आना, सर्दी जुकाम, साँस के रोग, माँ से सम्बन्ध खराब होना या माँ की हेल्थ खराब होना। उपाय दूध चावल और दही का दान करें, भगवान   शिव की पूजा करें, माँ का सम्मान करें।

         चन्द्र मंत्र   ओम श्रंग श्रृंग श्रोंग से चंदरमसे  नमः।


  • मंगल के अशुभ प्रभाव से बार बार दुर्घटना होना,  हाई ब्लड प्रेशर, बात बात पर गुस्सा आना, भाइयों से मतभेद होना, ब्लड से रिलेटेड बीमारियां हो सकती हैं।उपाय हनुमान जी की पूजा करें, मसूर की दाल का दान करें।

         मंगल मंत्र  ओम क्रम क्रीम क्रोम सै भौमाय नमः।


  • बुध के अशुभ प्रभाव में बिज़नेस में हानि, गले के रोग, नाक के रोग, एजुकेशन में दिक्कत और विचार अस्थिर हो सकते हैं।उपाय  दुर्गा माँ की पूजा करें, बहनो को यथा संभव उपहार दें , हरी मूंग की दाल का दान करें और पन्ना धारण कर सकते हैं।
         ओम बरांग ब्रिंग ब्रॉन्ग से  बुधाय नमः। 

  • गुरु के अशुभ प्रभाव से कान  के रोग, इनकम में कमी, विवाह मैं देरी, संतान में देरी, पूजा पाठ में मन न लगना आदि परेशानियां हो सकती हैं। उपाय अपने से बड़ों का सम्मान करें, गुरु की पूजा करें,

          गुरु मंत्र  ओम ग्राम ग्रीम ग्रौं सै गुरवे नमः.


  • शुक्र  के अशुभ प्रभाव से शुगर का रोग, प्रेम में असफलता, वाहन से कष्ट, यूरिन से रिलेटेड रोग हो सकते हैं। उपाय माँ लक्ष्मी की पूजा करें, स्त्री का सम्मान करें, दूध दही घी का दान करें।

         शुक्र मंत्र   ओम द्रंग  ड्रिंग दरोग सै शुक्राय नम।


  • शनि कैंसररोग, पैरों में  रोग, वायु विकार, नौकरी में परेशानी हो सकती है।उपाय  शनिवार को मीट और शराब का सेवन न करें, नौकरों को खुश रखें, शनिदेव की पूजा करें और  काली उरद की दाल का दान करें।

         शनि मंत्र  ओम प्रंग प्रिंग प्रोन्ग साईं शनये नमः।


  • राहु के अशुभ प्रभाव में दिमागी परेशानी, नेचर मैं प्राउड आना स्किन से सम्भंदित रोग हो सकते हैं।उपाय  माँ सरस्वती की पूजा करें, काले तिल  और तेल का दान करें।

         राहु मंत्र  ओम भरंग  भ्रिंग भरोंग सै राहवे नमः।


  • केतु  के अशुभ प्रभाव से दर्द रक्त विकार नाना नानी के परिवार में परेशानी हो सकते हैँ।उपाय गणेश जी की पूजा करें, कुत्तों को दूध पिलायें और शनि की वस्तुओ  का दान करें।

         केतु मंत्र   ओम सृंग स्रिंग स्रोंग सै  केतवे नमः।

अगर इस सम्बन्ध में आप कोई भी जानकारी चाहते हैं तो इस ब्लॉग पर पूछ सकते हैं या फ़ोन कर सकते हैं।
                                                  ओम नमः शिवाय

Saturday, 19 December 2015

SHANI DEV


                                                                     शनि देव 

  • ज्योतिष शास्त्र में शनि गृह को एक क्रूर (निर्दयी) गृह कहा जाता है शनि देव के नाम से लोगों को भयभीत किया जाता है जबकि सूर्य पुत्र शनिदेव सभी ग्रहों के बीच न्यायधीश (जज ) का कार्य करते हैं।  ये व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं जब ये किसी पर कृपा करते हैं तो उसे मालामाल कर देते हैं और दूसरी तरफ जब ये किसी पर कुपित होते हैं तो उसे कंगाल बनाने मैं भी देर नहीं करते।  जब तक इनके उपाय किये जाएँ तब तक तो ये उस व्यक्ति के जीवन को तहस नहस कर चुके होते हैं। अगर ये नाराज हों तो सभी गृह अशुभ फल देने लगते हैं शनिदेव व्यक्ति के जीवन को कभी भी स्वर्ग या नरक बना सकते हैं।  वैसे तो न्यायप्रिय, धर्मराज और नाराज होने पर यमराज का भी रूप धारण कर सकते हैं ज्योतिष शास्त्र में आप सभी ने सुना होगा शनि की साढ़ेसाती। ये सभी के जीवन में अपना असर जरूर  दिखाती है लेकिन जैसा की लोगों के मन में डर होता है साढ़ेसाती हमेशा बुरी नहीं होती।  सबसे पहले हम यह जान ले की साढ़ेसाती किसे कहते हैं यह ढाई ढाई साल का के तीन पीरियड होते हैं जब शनि जातक की गोचर राशि में  12 वे,पहले और दूसरे भाव मैं आता है यह हर भाव (राशि) में ढाई वर्ष रहते हैं और तीन भावों में सादे सात साल रहते हैं इसलिए इसे शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है।  जन्मकुंडली में  यदि शनि शुभ और योगकारक हो तो ज्यादा अशुभ फल नहीं देता।  मकर राशि और कुम्भ राशि शनि की अपनी राशियाँ हैं इसलिए साढ़ेसाती में इन राशियों के व्यक्तिओं को ज्यादा कष्ट नहीं होता हाँ शनि के शुभ प्रभावों में  कमी जरूर आती है।  यदि कुंडली में शनि अशुभ, बाधक या मारक स्थिति में हो तो जातक को अपमान, असफलता, जेलयात्रा, निराशा और लम्बे समय तक चलने वाले रोग देता है। शनि कुंडली में जिस भाव में बैठता है उस भाव के फलों में वृद्धि करता है और अपनी तीसरी, सातवीं और दसवीं दृष्टि से जिन भावों को देखता है वहां के फलों मैं कमी लाता  है। अब आप को बतातें हैं सभी राशियों में शनि की साढ़ेसाती के शुभ और अशुभ फल।



  राशि                    पहली ढैया                           दूसरी ढैया                         तीसरी ढैया

 मेष                       सम  (नूट्रल)                       अशुभ                                शुभ
 वृष                       अशुभ                                शुभ                                   शुभ
मिथुन                    शुभ                                   शुभ                                  अशुभ
कर्क                        शुभ                                   अशुभ                               अशुभ
सिंह                       अशुभ                               अशुभ                                शुभ
कन्या                     अशुभ                               शुभ                                   शुभ
तुला                       शुभ                                   शुभ                                 अशुभ
वृश्चिक                    शुभ                                 अशुभ                               सम
धनु                         अशुभ                               सम                                 शुभ
मकर                        सम                                 शुभ                                 शुभ
कुम्भ                       शुभ                                  शुभ                                 सम
मीन                         शुभ                                  सम                                अशुभ

साढ़ेसाती के प्रभाव को कम  करने के उपाय
क्योकि शनि को एक दास (नौकर) गृह कहा जाता है इसलिए सबसे पहले अपने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों लोगों  की जितनी ही सके मदद करें।
कम से कम शनिवार के दिन मांस और शराब का सेवन न करें ।
माता पिता का आदर करें|
शनि देव की पूजा करें।
हनुमान जी भगवन शिव की पूजा करें।
शनिवार को उड़द की दाल, तेल और काले कपडे का दान करें।
अपने चरित्र को अच्छा बनाये और गलत कामों से दूर रहें।
अगर किसी से धन लें तो उसे जरूर वापिस करें।
यदि आप इस सम्बन्ध में कोई भी प्रशन पूछना चाहते हैं तो इसी ब्लॉग मैं पूछ सकते हैं । 
तो यह हैं शनि देव के कुछ  उपाय और जितना हो ओम नमः शिवाय का जाप  करें
शनि देव का प्रभाव शाली  मंत्र है  ओम प्रांग प्रिंग प्रोन्ग सै शनये नमः

                                              जय शनिदेव महाराज की 

MOOLANK 6

                                          मूलांक   6 


ऐसे व्यक्ति जिनका जन्म किसी भी माह की 6, 15 और 24 तारिख को हुआ हो उनका मूलांक 6  होता है इस अंक के स्वामी गृह शुक्र हैं । 
अंक 6 वाले स्वाभाव से थोड़ा आराम पसंद होते हैं दोस्तों की संख्या बहुत होती है अपोजिट सेक्स से बहुत मदद मिलती है । 
अंक 15  वालों के  जीवन मैं आराम कम  ही मिलता है और कई केस में इनकी मैरिज लाइफ ज्यादा सफल नहीं रहती। 
अंक 24  वाले दिल के साफ होते हैं भावुक स्व्भाव  के  होते हैं ये सामने वाले पर बहुत जल्दी विश्वाश कर लेते हैं ।  ये लोग जिससे भी अटैच्ड होते हैं दिल से होते हैं। 
मूलांक 6 अपने आप में एक सम्पूर्ण नंबर है इस अंक की महिलाएं बहुत सुन्दर होती हैं और इनके गाल पर डिंपल (गढ़े) पड़ते हैं ये दिल की बहुत कोमल होती हैं कोई भी इनकी तरफ बहुत जल्दी अट्रैक्ट हो जाता है।  ऐसे लोग बहुत पक्के इरादों वाले होते हैं। इनके अंदर एक कलाकार घुपा  होता है और ये संगीत, डांस या ड्राइंग किसी भी एक कला में सम्पूर्ण होते हैं । ये अपने मेहमानो और दोस्तों के स्वागत के लिए हमेशा त्यार  रहते हैं इनकी कोशिश यही होती है की सभी लोग इनसे खुश रहें।  जब कभी ये गुस्से में होते हैं तो इनको सहन करना बहुत कठिन होता है।  ये  जीवन मैं हर चीज परफेक्ट चाहते हैं अपने आप को और अपने घर को सुन्दर बना कर रखने का बहुत शौंक  होता है । इनके अंदर सबसे बड़ी कमी ये होती है की ये स्व्भाव से जिद्दी होते हैं इनकी कोशिश हमेशा ये होती है की सामने वाला हमेशा इनकी बात को मान जाया करे।  किसी बात पर अड़े रहना और ईर्ष्या की भावना   बहुत होती है। ऐसे लोग ऑफिस में  किसी से कम्पीटीशन सहन नहीं कर पाते इस कारन कई बार इन्हे शर्मिंदा भी होना पड़ता है । 
शिक्षा   अच्छे स्तर की होती है एजुकेशन के अलावा किसी एक कला में भी नाम कमाते हैं जैसे म्यूजिक, डांस  या कोई भी  स्पोर्ट्स । 
पारिवारिक  सम्बन्ध   जीवन में प्रेम करना क्या होता है ये 6  अंक वालों से सीखा जा सकता है  ये बिना किसी  स्वार्थ के रिश्तों को निभाते हैं । मैरिज देर से होने के चांस होते हैं अपने नेचर की वजह से कई बार मैरिज  लाइफ डिस्टर्ब हो जाती है।  लाइफ पार्टनर की वजह से फाइनेंसियल लोसेस उठाने पड़ते हैं कई केस में  2  मैरिज के चांस भी होते हैं । भाई बहनो से रिश्ते ठीक रहते हैं। 
हेल्थ    बॉडी स्ट्रक्चर बहुत अच्छा होता है बीमार कम ही होते हैं इनको शुगर, हार्ट प्रॉब्लम, कोल्ड, कफ, यूरिन  इन्फेक्शन,  सेक्सुअल डिजीज होने के चांस होते हैं । 
बिज़नेस या जॉब   किसी के अंडर काम करना थोड़ा कठिन लगता है फिल्म इंडस्ट्री, मीडिया, ब्यूटी पार्लर, फोटो  स्टूडियो, आर्ट गैलरी ज्वेलरी और आर्टिफीसियल ज्वेलरी या फैशन डिजाइनिंग के  काम इनके लिए शुभ होते हैं । कई बार विदेश में सैटल होने के चांस होते हैं। 
शुभ दिन तारिख  6 , 15 और 24        शुभ वॉर मंगलवार, गुरुवार और शुक्रवार 
जीवन के शुभ वर्ष  6, 15  24 , 33 , 42 , 51, 60, 69 और 78 वा  वर्ष। 
शुभ देवी देवता  माँ दुर्गा भगवती 
दान के लिए पदार्थ  चांदी, चावल, घी, सफ़ेद वस्त्र, दही 
शुभ मंत्र   ओम द्रंग दरिंग दरोग से शुक्राय नमः 

                                                   ओम नमः शिवाय 

Friday, 18 December 2015

Moolank 5

                                                               मूलांक   5
ऐसे व्यक्ति जिनका जन्म किसी भी माह की 5, 14 या 23  तारिख को हुआ हो उनका मूलांक 5  होता है जिनके स्वामी गृह बुध हैं।
सवभाव   इनका स्वभाव बहुत चंचल होता है बहुत जल्दी किसी को भी अपना मित्र बना लेते हैं । आत्मविश्वास बहुत होता है हर बात को दिल के बजाय दिमाग से सोचते हैं।  धन कमाने की इछा  बहुत तेज होती है और धन कमाने में सफल भी  रहते हैं।  ये अपनी उम्र से छोटे दिखाई देते हैँ अपनी बातों से दूसरों को मोहित करना जानते हैं।  इनमें कार्य करने की क्षमता बहुत होती है और ये अपना कार्य बहुत जल्दी करने की कोशिश करते हैं।  ये एक जगह टिक कर बैठना पसंद नहीं करते और अगर बैठे भी हों तो शरीर का कोई न कोई भाग हरकत में रहता है । दिमाग में विचार बहुत आते हैं और उन विचारों पर  कार्य भी करते हैं ।  23  अंक वाले थोड़े  लापरवाह सवभाव के होते हैं।  मूलांक 5 वालों के जीवन का एक ही उदेश्य होता है ज्यादा से ज्यादा पैसा कमाना।  ज्यादा समय तक किसी बात की चिंता या शोक नहीं करते अगर इनके साथ कोई बुरा भी कर दे तो जल्दी ही उसे माफ़ कर देते हैं । इनके स्वभाव मैं जल्दबाजी, चिड़चिड़ापन और जल्दी गुस्सा आने की प्रवर्ति होती है । ऐसे लोग मेहनत के बजाय दिमाग से काम करना ज्यादा पसंद करते हैं । इन जातकों की सबसे बड़ी कमी यह है की ये अपने दिमाग का इतना अधिक प्रयोग कर लेते हैं की बहुत जल्दी मानसिक संतुलन खो देते हैँ ।
शिक्षा   इनकी शिक्षा अच्छे  स्तर की होती है अपने सवभाव के कारण कई बार शिक्षा पूरी नहीं हो पाती ।
परिवार   ऐसे लोग अपने भाई बहनो की बहुत मदद करते हैं लेकिन इसके बदले में इनको अच्छाई  नहीं मिलती दोस्त बहुत होते हैं।  लेकिन प्यार या दोस्ती ज्यादा समय तक नहीं चलती। विपरीत सैक्स वालों से इनकी बहुत बनती है।
रोजगार   नौकरी और व्यापर दोनों कर सकते हैं यह ऐसे व्यापर करना चाहते हैं जहां काम से कम समय में ज्यादा से ज्यादा धन कमाया जा सके प्रिंटिंग से  सम्भंदित काम इनके लिए शुभ होते हैं।  नौकरी मैं बैंक कर्मचारी , शेयर बाजार या कोई भी ऐसा काम जिसमे लोगों से मिलना जुलना होता हो इनके लिए शुभ रहता  है।
सेहत   छाती में संकर्मण, खांसी, तव्चा से सम्भंदित रोग, मानसिक तनाव से बच कर रहना चाहिए ।
शुभ दिन  तारिख 5, 14  और 23
शुभ वॉर  बुधवार, गुरुवार और शुकवार
शुभ धातु   सोना     शुभ रत्न   पन्ना
दान की वस्तु   हरे वस्त्र, मूंग की दाल, घी और पालक
शुभ मंत्र   ओम ब्रंग ब्रिंग ब्रोंग सै बुधाय नमः

                                                        ओम नमः शिवाय 

Thursday, 17 December 2015

VASTU SHASTRA

                                                      वास्तु शास्त्र
वास्तु शास्त्र में  आठ दिशाए होती हैं  जिनमे चार मुख्य दिशाए होती हैँ  पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण।  इसके अलावा चार कोणीय दिशाएं होती हैँ  उत्तरपूर्व / ईशान कोण , दक्षिणपूर्व / आग्नेय कोण, दक्षिण पश्चिम / नैत्रक्या कोण  और उत्तर पश्चिम / वायव्ये कोण।  वास्तु शास्त्र में सभी दिशाओं  का अपना अलग अलग महत्व  होता है।  प्रत्येक  दिशा में  अलग अलग गृह और देवता का वास होता है।
(पूर्व दिशा ) पूर्व दिशा का स्वामी सूर्य देव हैँ इस दिशा के देवता इंद्रा हैं यह दिशा हमें सुख समृद्धि, धन अच्छा स्वास्थय  देती है।  अगर मकान इस दिशा में कोई दोष हो तो घर के मुखिया के स्वास्थय  पर बुरा प्रभाव पड़ेगा और उसकी आयु में  कमी होगी और इस दिशा में  दोष होने पर ह्रदय, दांत, सिर और जीभ सम्बन्धी रोग हो सकते हैं अत मकान में इस दिशा को थोड़ा खुला रखना चाहिए ।
( पश्चिम दिशा )  इस दिशा के स्वामी शनि गृह पर देवता वरुण देव हैं  यह दिशा जीवन में सफलता, प्रसन्ता और प्रसिद्धि प्रदान करती है।  अगर इस दिशा  में  दोष हो तो मानसिक तनाव बना रहता है, किसी भी कार्य में  सफलता नहीं मिलती और पेट से सम्बंधित रोग हो सकते हैं।  इस दिशा में  भरी निर्माण करना चाहिए।
( उत्तर दिशा  )  इस दिशा के स्वामी गृह बुध और देवता कुबेर हैं जो की धन के भी देवता हैं।  यह दिशा बुद्धि, ज्ञान और धन के लिए शुभ होती है यह दिशा माता के सुख का भी प्रतीक मानी  जाती है। इस दिशा में  दोष होने पर दिल और छाती से सम्भंदित रोग हो सकते हैं इसलिए मकान मैं इस दिशा को थोड़ा खुला रखना चाहिए।
( दक्षिण दिशा )  इस दिशा के स्वामी गृह मंगल और देवता यम हैं  यह दिशा यश,सफलता और धैर्ये के लिए शुभ होती है यह दिशा पिता के सुख का भी प्रतीक मणि जाती है।  इस दिशा में दोष होने पर आत्मविश्वास में कमी हो सकती है और इस दिशा में पानी और शीशा नहीं होना चाहिए।  मकान मैं इस दिशा मैं जितना भारी रखेंगे उतना लाभ होगा।
( उत्तर पूर्व / ईशान कोण )  इस दिशा के स्वामी गृह बृहस्पति हैं इस दिशा से ज्ञान, धैर्य और साहस का सुख मिलता है  इस दिशा से मानसिक और आर्थिक सम्पनता मिलती है इस दिशा में दोष होने पर गर्दन, कान और आँखों  में कष्ट हो सकता है ।  मकान में  इस दिशा को साफ़ सुथरा खुला और कम निर्माण करना चाहिए।  इस दिशा में शौचालय और कूड़ा करकट नहीं रखना चाहिए।
( दक्षिण पूर्व / आग्नेय कोण )  इस दिशा के स्वामी गृह शुक्र और देवता अग्नि है  यह दिशा शयन, निंद्रा, काम और प्रजनन का सुख देती हैं।  यह दिशा घर के सदस्यों को ऊर्जावान बनती है।  इस दिशा में दोष होने पर  बाई आँख, बाई भुजा और घुटनो में दोष हो सकता है  इसलिए इस दिशा में पानी या पानी का टैंक कभी नै रखना चाहिए।
( दक्षिण पश्चिम / नैत्रक्या कोण )  इस दिशा के स्वामी गृह राहु और देवता नैकरती नमक राक्षसनी है। यह दिशा सभी प्रकार की कठिनाइयों से लड़ने की क्षमता, सही निर्णय लेने की क्षमता और आत्मविश्वास प्रदान करती है  इस दिशा में दोष होने पर अकाल मृत्यु,  दुर्घटना, कैंसर, पोलियो, किडनी और पैरों  में  रोग हो सकते हैं।  मकान में इस दिशा को कभी भी खाली नहीं रखना चाहिए।  अगर इस दिशा में पानी का स्त्रोत हो तो जीवन में  गरीबी बनी रहती है।
( उत्तर पश्चिम / वायवे कोण )  इस दिशा के स्वामी गृह चन्दर और देवता पवन देव हैं।  यह दिशा अच्छे सम्बन्ध, मित्रता, मानसिक विकास प्रदान करती है इस दिशा में  दोष होने पर आँखों के रोग, पेट के रोग, अस्थमा  और घर की महिला को रोग हो सकता है। इसलिए वायव्य क्षेत्र को ईशान क्षेत्र से नीचे नहीं रखना चाहिए।                                       
                                                                           ओम नमः शिवाय