शनि देव
- ज्योतिष शास्त्र में शनि गृह को एक क्रूर (निर्दयी) गृह कहा जाता है शनि देव के नाम से लोगों को भयभीत किया जाता है जबकि सूर्य पुत्र शनिदेव सभी ग्रहों के बीच न्यायधीश (जज ) का कार्य करते हैं। ये व्यक्ति को उसके कर्मों के अनुसार ही फल देते हैं जब ये किसी पर कृपा करते हैं तो उसे मालामाल कर देते हैं और दूसरी तरफ जब ये किसी पर कुपित होते हैं तो उसे कंगाल बनाने मैं भी देर नहीं करते। जब तक इनके उपाय किये जाएँ तब तक तो ये उस व्यक्ति के जीवन को तहस नहस कर चुके होते हैं। अगर ये नाराज हों तो सभी गृह अशुभ फल देने लगते हैं शनिदेव व्यक्ति के जीवन को कभी भी स्वर्ग या नरक बना सकते हैं। वैसे तो न्यायप्रिय, धर्मराज और नाराज होने पर यमराज का भी रूप धारण कर सकते हैं ज्योतिष शास्त्र में आप सभी ने सुना होगा शनि की साढ़ेसाती। ये सभी के जीवन में अपना असर जरूर दिखाती है लेकिन जैसा की लोगों के मन में डर होता है साढ़ेसाती हमेशा बुरी नहीं होती। सबसे पहले हम यह जान ले की साढ़ेसाती किसे कहते हैं यह ढाई ढाई साल का के तीन पीरियड होते हैं जब शनि जातक की गोचर राशि में 12 वे,पहले और दूसरे भाव मैं आता है यह हर भाव (राशि) में ढाई वर्ष रहते हैं और तीन भावों में सादे सात साल रहते हैं इसलिए इसे शनि की साढ़ेसाती कहा जाता है। जन्मकुंडली में यदि शनि शुभ और योगकारक हो तो ज्यादा अशुभ फल नहीं देता। मकर राशि और कुम्भ राशि शनि की अपनी राशियाँ हैं इसलिए साढ़ेसाती में इन राशियों के व्यक्तिओं को ज्यादा कष्ट नहीं होता हाँ शनि के शुभ प्रभावों में कमी जरूर आती है। यदि कुंडली में शनि अशुभ, बाधक या मारक स्थिति में हो तो जातक को अपमान, असफलता, जेलयात्रा, निराशा और लम्बे समय तक चलने वाले रोग देता है। शनि कुंडली में जिस भाव में बैठता है उस भाव के फलों में वृद्धि करता है और अपनी तीसरी, सातवीं और दसवीं दृष्टि से जिन भावों को देखता है वहां के फलों मैं कमी लाता है। अब आप को बतातें हैं सभी राशियों में शनि की साढ़ेसाती के शुभ और अशुभ फल।
राशि पहली ढैया दूसरी ढैया तीसरी ढैया
मेष सम (नूट्रल) अशुभ शुभ
वृष अशुभ शुभ शुभ
मिथुन शुभ शुभ अशुभ
कर्क शुभ अशुभ अशुभ
सिंह अशुभ अशुभ शुभ
कन्या अशुभ शुभ शुभ
तुला शुभ शुभ अशुभ
वृश्चिक शुभ अशुभ सम
धनु अशुभ सम शुभ
मकर सम शुभ शुभ
कुम्भ शुभ शुभ सम
मीन शुभ सम अशुभ
क्योकि शनि को एक दास (नौकर) गृह कहा जाता है इसलिए सबसे पहले अपने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों लोगों की जितनी ही सके मदद करें।
कम से कम शनिवार के दिन मांस और शराब का सेवन न करें ।
माता पिता का आदर करें|
शनि देव की पूजा करें।
हनुमान जी भगवन शिव की पूजा करें।
शनिवार को उड़द की दाल, तेल और काले कपडे का दान करें।
अपने चरित्र को अच्छा बनाये और गलत कामों से दूर रहें।
अगर किसी से धन लें तो उसे जरूर वापिस करें।
यदि आप इस सम्बन्ध में कोई भी प्रशन पूछना चाहते हैं तो इसी ब्लॉग मैं पूछ सकते हैं ।
तो यह हैं शनि देव के कुछ उपाय और जितना हो ओम नमः शिवाय का जाप करें
शनि देव का प्रभाव शाली मंत्र है ओम प्रांग प्रिंग प्रोन्ग सै शनये नमः

No comments:
Post a Comment