गोचर कुंडली के 12 भावों में सूर्य के फल
- जिस दिन, महीने, वर्ष, समय और स्थान में किसी व्यक्ति का जन्म होता है उसके अनुसार ग्रहों की स्थिति देख कर जन्म कुंडली बनाई जाती है और गृह जिस राशि में गोचर करते हैं अर्थात कौन सा गृह अभी आज किस स्तिथि में है (वर्तमान में) उसके अनुसार जीवन में कब कैसे फल मिलेंगे यह जानने के लिए गोचर कुंडली बनाई जाती है। आज हम आपको बताएंगे गोचर कुंडली के 12 भावों में सूर्य के फल के बारे में।
- भाव फल '
- पहला भाव जीवन में परेशानी, खर्च अधिक, बात बात में गुस्सा आना और कार्यों में बाधाएं आती हैं।
- 2 रा भाव व्यापर में धोखा, धन का नाश, खर्च अधिक, सुख में कमी, जिद्दी स्वाभाव और आँखों में तकलीफ रहती है
- 3रा भाव अचानक धन की प्राप्ति, धन का लाभ, परिवार में खुशियां, मन में प्रसन्नता और रोगों से मुक्ति मिलती है।
- 4 था भाव शरीर में आलस, शरीर में रोग, पारिवारिक सुख में कमी और पत्नी से वाद विवाद रहता है।
- 5 व भाव मानसिक चिंता , मानसिक परेशानी, कार्यों में बाधाएं, शरीर में रोग और दुश्मन से परेशानी रहती है।
- 6ठा भाव स्वस्थ शरीर, परिवार में खुशियां, धर्म में रूचि और दुश्मनो पर विजय प्राप्त होती है।
- 7वा भाव गरीबी, थकाने वाली यात्राएँ, पेट के रोग, मानसिक परेशानी और मान सम्मान में कमी आती है
- 8 वा भाव शरीर में रोग, परिवार में झगडे, रोजगार में परेशानी और पत्नी से मतभेद रहते हैं।
- 9 वा भाव व्यवसाय और रोजगार मैं असफलता, दुर्घटना के योग, पारिवारिक कठिनाइयां, और मानसिक तनाव रहता है।
- 10 व भाव कार्य बनते हैं, धन का लाभ, नौकरी में तरक्की और व्यापार में लाभ होता है।
- 11 वा भाव समाज में सम्मान, यश, धन का लाभ, रोग से छुटकारा, कोई बड़ी सफलता मिलती है।
- 12 व भाव मानसिक तनाव, जीवन में सफलता और आर्थिक नुकसान होता है।
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