कालसर्प दोष और उसके उपाय
- जब किसी व्यक्ति की जन्मकुंडली में सभी सातों गृह राहु और केतु के एक ही तरफ आ जाते हैं तो कालसर्प दोष कहलाता है। जब राहु और केतु के बीच में सभी गृह आ जाएँ और कुंडली का कोई भी भाव खाली न रहे तो पूर्ण कालसर्प दोष कहलाता है जब राहु और केतु के बीच से एक गृह बाहर आ जाता है तो आंशिक कालसर्प दोष कहलाता है और जब एक से ज्यादा गृह बाहर आ जाएँ तो कालसर्प दोष समाप्त माना जाता है। अगर कोई व्यक्ति बहुत मेहनत करता है लेकिन उसे उस मेहनत का पूरा फल नहीं मिलता या बहुत देर से मिलता है
- यदि कोई व्यक्ति अपने जीवन में मृत्यु तुल्ये कष्ट भोग रहा हो।
- यदि कोई व्यक्ति शारीरिक और मानसिक परेशानियों में घिरा रहता हो।
- यदि किसी व्यक्ति के विवाह में देरी या वैवाहिक जीवन में बहुत लड़ाई झगडे होते हों।
- यदि किसी व्यक्ति को संतान न होती हों या कन्या संतान ही हों तो ऐसे व्यक्ति को अपनी कुंडली एक बार किसी योग्य व्यक्ति को जरूर दिखानी चाहिए क्योंकि हो सकता है कि वह कालसर्प दोष से पीड़ित हो क्योंकि राहु और केतु के बीच में आने के कारण सभी गृह अपने पूरे फल देने में अस्मर्थ हो जाते हैं। उसे अपने अच्छे कर्मों का फल भी नहीं मिल पाता और वह पूरा जीवन दुर्भाग्य में घिरा रहता है।
- राहु और केतु दोनों छाया गृह हैं सर वाले भाग को राहु और धड़ वाले भाग को केतु कहा जाता है। जो व्यक्ति कालसर्प दोष से पीड़ित होता है उसके जीवन में जब भी राहु या केतु की दशा या अन्तर्दशा आती है तो उसके जीवन में कष्ट ओर अधिक हो जाते हैं। कालसर्प दोष के कुछ उपाय हैं जिन्हे कर के आप उन कष्टों और प्रभावों को कम कर सकते हैं
- राहु और केतु की वस्तओं का दान करें जैसे काला या सफेद कम्बल, काले तिल, सरसों का तेल नारियल आदि जितना हो सके अपने से आर्थिक रूप से कमजोर लोगों की मदद करें।
- शिवलिंग पर चांदी के नाग और नागिन का जोड़ा चढ़ाएं। ।
- महामृत्युंजय मन्त्र का जाप करें।
- हनुमान जी की पूजा करें।
- सावन महीने के 30 दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाएं।
- राहु और केतु के मन्त्रों का जाप करें।
- कालसर्प योग यन्त्र के सामने सरसों के तेल का दिया जलाकर ओम नमः शिवाय का जाप करें।
- ये कुछ उपाय दिए गए हैं इनमेँ जो भी संभव हो आप कर सकते हैं ।
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